हिमाचल विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटी कांग्रेस, जनता की राय से तैयार करेगी घोषणा पत्र, जानें क्या होंगे मुद्दे?

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शिमला – जसपाल ठाकुर 

हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी दलों ने तैयारी शुरू कर दी है.

चुनाव को लेकर कांग्रेस ने ऐलान किया है कि वह चुनावी घोषणा पत्र जनता से पूछ कर तैयार करेगी.

हर विधानसभा क्षेत्र में समाज के सभी वर्गों के साथ चर्चा करने और सुझाव लेने के बाद ही घोषणा पत्र तैयार होगा.

हिमाचल कांग्रेस ने ये भी घोषणा की है कि सत्ता में आने पर सबसे पहला फैसला पुरानी पेंशन योजना को बहाल करना होगा.

सोमवार को राजधानी शिमला में कांग्रेस मुख्यालय पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सिंह ने कहा कि घोषणा पत्र तैयार करने के लिए लगातार बैठकों का दौर जारी है और ये मेनिफेस्टो कांग्रेस का नीतिगत दस्तावेज होगा.

कांग्रेस सरकार बनने के बाद इसे अक्षरश: लागू किया जाएगा. कांग्रेस 35 मुद्दों पर घोषणा पत्र तैयार करेगी, प्रदेश की आर्थिक स्थिति को देखते हुए घोषणाएं की जाएंगी.

इस मौके पर विधायक कर्नल धनी राम शांडिल ने कहा कि कांग्रेस का चुनावी घोषणा पत्र जनता की आवाज होगा.

नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने कहा सरकार बनने पर ओपीएस पर पहले ही दिन फैसला लिया जाएगा क्योंकि राजस्थान, छत्तीसगढ़ और झारखंड में भी कांग्रेस सरकार ने इसे लागू किया है.

बेरोजगारी, किसान और सेना के जवानों पर फोकस

कांग्रेस हर विधानसभा क्षेत्रों में युवा, बेरोजगार, कर्मचारी, छात्र, महिलाएं, वरिष्ठ नागरिक, किसान बागवान, पूर्व सैनिक समेत हर वर्गों के साथ चर्चा करेगी.

पार्टी के नेता और पदाधिकारी इन सभी वर्गों की मांगें और राय जानेंगे. जो भी मांग और सुझाव आएंगे उन्हें सिलेक्ट कमेटी को भेजा जाएगा.

सिलेक्ट कमेटी तय करेगी कि कौन-कौन से मुद्दे घोषणा पत्र में शामिल किए जाएंगे. इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के बहाने कांग्रेस ने एकजुटता का भी संदेश दिया है.

शामिल होंगे यह 35 खास मुद्दे

इस दौरान घोषणा पत्र समिति के सदस्य भवानी सिंह पठानिया ने बताया कि घोषणा पत्र के लिए पहले चरण में 35 मुद्दे शामिल किए जाएंगे.

जनता के सुझाव लेने के लिए कांग्रेस एक टॉल फ्री नंबर के अलावा ई मेल भी जारी की जाएगी. कांग्रेस सरकार में होने वाली फिजुलीखर्ची पर लगाम लगाने और राजनीतिक सुधार को घोषणा पत्र में शामिल करेगी.

भवानी पठानिया ने कहा कि प्रदेश की आर्थिक स्थिती ठीक नहीं है, सत्ता में आने के बाद फालतू खर्चों पर रोक लगेगी, बोर्डों और निगमों के चेयरमैन, उपाध्यक्षों की संख्या भी कम की जाएगी.

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