हिमखबर डेस्क
हिमाचल प्रदेश में आगामी पंचायती राज और शहरी निकाय चुनावों को निष्पक्ष और सुचारू रूप से संपन्न कराने के लिए राज्य निर्वाचन आयोग ने सख्त रुख अपना लिया है।
आयोग ने स्पष्ट आदेश जारी किए हैं कि अब चुनाव प्रक्रिया से जुड़े किसी भी अधिकारी या कर्मचारी का तबादला आयोग की लिखित अनुमति के बिना नहीं किया जा सकेगा। यह रोक चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक प्रभावी रहेगी।
‘अधिकारियों की निरंतर तैनाती चुनाव संचालन के लिए अनिवार्य’
राज्य निर्वाचन आयोग के सचिव सुरजीत सिंह राठौर द्वारा जारी पत्र के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए प्रदेश में पंचायती राज संस्थाओं और शहरी निकायों के चुनाव 31 मई 2026 तक संपन्न कराए जाने हैं।
चुनावी तैयारियों के तहत मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण का कार्य भी शुरू कर दिया गया है। आयोग का मानना है कि अधिकारियों की निरंतर तैनाती चुनाव संचालन के लिए अनिवार्य है।
तबादले के लिए माननी होंगी कड़ी शर्तें
आयोग ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी अत्यंत अपरिहार्य स्थिति (जैसे गंभीर स्वास्थ्य कारण) में तबादला करना जरूरी हो, तो संबंधित विभाग को पहले राज्य निर्वाचन आयोग से अनुमति लेनी होगी।
विभाग को यह प्रमाणित करना होगा कि संबंधित अधिकारी वर्तमान में किसी चुनाव ड्यूटी में तैनात नहीं है। तबादला किसी विशेष बाध्यकारी कारण से किया जा रहा है।
मुख्य सचिव को जारी हुए निर्देश
आयोग ने चेतावनी दी है कि यदि बिना अनुमति के तबादला आदेश जारी किए जाते हैं, तो कोई भी अधिकारी कार्यमुक्त नहीं होगा। यदि नियमों का उल्लंघन कर किसी को कार्यमुक्त किया गया, तो इसके लिए संबंधित विभाग के कार्यालय प्रमुख को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया जाएगा।
निर्वाचन आयोग ने इस संबंध में मुख्य सचिव को पत्र लिखकर निर्देश दिए हैं कि सभी प्रशासनिक सचिवों और विभागाध्यक्षों को इस आदेश से तुरंत अवगत कराया जाए। आयोग का मुख्य उद्देश्य चुनावों को स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से आयोजित करना है।

