हिमाचल पंचायत चुनाव: आरक्षित सीट के बजाय दूसरी जगह से लड़ सकते हैं चुनाव, इन्हें मिला विकल्प

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हिमखबर डेस्क

हिमाचल प्रदेश में ग्रामीण सरकार बनाने को लेकर इन दिनों प्रदेश में उठापठक तेज हो गई है। पंचायत रोस्टर जारी होने के बाद सियासी गलियारो में उम्मीदवारों के चयन को लेकर राजनीतिक दल भी सक्रीय हो गए हैं। वहीं कई बीडीसी और जिला परिषद का चुनाव लडऩे वाले इच्छुक उम्मीदवार जो रोस्टर जारी होने के बाद सीट रिजर्व होने के चलते चुनाव नहीं लड सकते हैं उनके लिए नियम के अनुसर कई विकल्प खुले हैं। यदि किसी दावेदार का वार्ड आरक्षित हो जाता है, तो वह दूसरी जगह से भी चुनाव लड़ सकता है।

नियमों के अनुसार, जिला परिषद का चुनाव जिले के किसी भी जिला परिषद वार्ड से लड़ा जा सकता है, जबकि बीडीसी का चुनाव संबंधित ब्लॉक के किसी भी वार्ड से लडऩे का कानून में प्रावधान है। यानी आरक्षण के बाद सीट बदलने का विकल्प उम्मीदवारों के पास खुला रहता है। हालांकि, यह सुविधा सभी पदों के लिए लागू नहीं है। पंचायतीराज एक्ट के तहत प्रधान, उप-प्रधान और वार्ड मेंबर अपनी पंचायत से बाहर जाकर चुनाव नहीं लड़ सकते। यह प्रतिबंध इन पदों को स्थानीय स्तर तक सीमित रखता है, जबकि बीडीसी और जिला परिषद में क्षेत्रीय लचीलापन दिया गया है।

आरक्षण के चलते राज्य में कई जगह दिलचस्प ट्रेंड भी देखने को मिल रहा है। जिन पुरुष उम्मीदवारों की सीट महिला के लिए आरक्षित हो गई है, वे अब अपनी पत्नी या परिवार की महिला सदस्य को चुनाव मैदान में उतारने की तैयारी कर रहे हैं। इसके अलावा, कई दावेदार अब दूसरी सीटों से चुनाव लडऩे की रणनीति बना रहे हैं। हिमाचल प्रदेश की 3755 पंचायतों में सर्वोच्च न्यायालय के आदेशानुसार-31 मई से पहले चुनाव कराए जाने हैं। इसके लिए 7 अप्रैल को सभी जिलों के उपायुक्तों ने आरक्षण रोस्टर जारी कर दिया है। इसके बाद से ही प्रदेश में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं।

दूसरी जगह से चुनाव लडऩे की शर्तें

दूसरे वार्ड से चुनाव लडऩे के लिए उम्मीदवार को दो अहम शर्तें पूरी करनी होंगी। पहले उम्मीदवार का नाम वोटर लिस्ट में होना चाहिए और दूसरे जिस वार्ड से चुनाव लडऩा है, वहां नामांकन के समय एक प्रस्तावक होना अनिवार्य है। इन दोनों शर्तों के पूरा होने पर ही उम्मीदवार दूसरे क्षेत्र से चुनाव लड़ सकता है।

आरक्षण रोस्टर से बदले सियासी समीकरण

पंचायत चुनाव के लिए आरक्षण रोस्टर जारी होने के बाद प्रदेश में सियासी गणित पूरी तरह बदल गया है। महिलाओं के लिए 50 फीसदी आरक्षण के कारण कुल मिलाकर करीब 55 फीसदी सीटें रिजर्व हो गई हैं, जबकि पुरुषों और ओपन कैटेगरी के लिए लगभग 45 फीसदी सीटें ही बची हैं।

शहरी निकाय के मतदाता नहीं लड़ सकते चुनाव

पंचायतीराज एक्ट के मुताबिक शहरी निकाय, नगर निगम और नगर परिषद के मतदाता जिला परिषद का चुनाव नहीं लड़ सकते। इसी तरह किसी ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले नगर निकाय का मतदाता बीडीसी चुनाव के लिए भी अयोग्य होता है।

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