
शिमला – नितिश पठानियां
हिमाचल प्रदेश के सिरमौर से ताल्लुक रखने वाले 15 वर्षीय नमन भटनागर ने टेबल टेनिस के अंतरराष्ट्रीय पटल पर प्रतिभा का जौहर बिखेरा है। टीटी खिलाड़ी नमन हिमाचल का पहला प्लेयर बना है, जिसने व्यक्तिगत स्पर्धा में देश के लिए पदक हासिल किया है।
पोर्टो रिको के खिलाड़ी से नमन का सेमीफाइनल मुकाबला हुआ। मुकाबले में नमन 2-0 से पिछड़ रहा था, लेकिन तीसरे सैट में नमन ने शानदार वापसी कर स्कोर 2-1 का कर दिया। चौथा सैट भी जीतकर नमन ने स्कोर को 2-2 किया।
हालांकि, पांचवे सैट में भी नमन की 11-10 से लीड चल रही थी, लेकिन किस्मत ने पोर्टो रिको के खिलाड़ी रियोज का साथ दिया। 14-12 के स्कोर से नमन ने शानदार प्रदर्शन के बावजूद मैच को खो दिया।
सेमीफाइनल में पहुंचने पर नमन कांस्य पदक का हकदार बन गया। अंडर-15 में कांस्य पदक जीत कर समूचे हिमाचल सहित पैतृक जिला को नमन ने गौरवान्वित किया है। खास बात ये है कि नमन ने अंडर-17 में भी शानदार प्रदर्शन किया। एकल मुकाबले में नमन को क्वार्टर फाइनल मुकाबले में मेजबान देश इजिप्ट के खिलाड़ी से 3-2 से परास्त मिली।
बता दें कि नमन का चयन भारतीय दल में अंडर-15 व अंडर-17 मुकाबले के लिए हुआ था। बड़ी बात ये है कि अंडर-17 में चैंपियन बने यासीन गेबर को नमन ने अंडर-15 के क्वार्टर फाइनल मुकाबले में सीधे तीन सैटों में 3-0 से हराया था। गौरतलब है कि यासीन गेबर भी नमन की तरह प्रतियोगिता में अंडर-15 व अंडर-17 में हिस्सा ले रहा था।
उधर, टेबल टेनिस फेडरेशन अकादमी ने नमन को इस सफलता पर बधाई दी है। टीटीएफ ने कहा कि ये तो शुरुआत है, नमन यहीं नहीं रुकेगा, स्वर्ण का लक्ष्य भेदना है। नमन के पिता विकास भटनागर व माता दुर्गेश भटनागर अपने 15 वर्षीय बेटे की उपलब्धि पर बेहद गौरवान्वित हैं।
परिवार मूलतः पांवटा साहिब का रहने वाला है, लेकिन पिता की नाहन जेल में बतौर सहायक जेल अधीक्षक तैनाती के दौरान नमन ने टेबल टेनिस के गुर सीखने शुरू किए थे। 8 साल की उम्र से ही नमन ने टेबल टेनिस खेलना शुरू कर दिया था। माता-पिता ने बेटे के लिए टेबल टेनिस की तमाम सुविधाओं को घर पर ही जुटाया।
नमन के पिता ने मीडिया से बातचीत में कहा कि छोटे शहर में सुविधाएं कम थी। उन्होंने इस बात का भी खुलासा किया कि बचपन से ही नमन को यू टयूब पर अंतरराष्ट्रीय टेबल टेनिस के खिलाड़ियों के मैच देखने का शौक रहा। यहां से भी नमन ने काफी टिप्स हासिल किए।
