स्मृति

--Advertisement--

Image

हिमखबर – डेस्क

स्मृति के पथ पर, तुमको खोज पाना
थोड़ा कठिन था।

फिर भी तुमको, खोज पाया मैं
स्वयं की, आत्म अनुभूति में।

स्मृति के पथ पर, जो शेष रह गया था
वो सब, धुंधला-धुंधला सा ही था।

फिर भी तुम को, खोज पाया मैं
स्वयं के आत्ममंथन में।

स्मृति के पंथ पर, तुमको भूल जाना नामुमकिन था
फिर भी भूल कर भी, न भूल पाया अंतर्मन में तुमको।

मौलिकता प्रमाण पत्र

मेरे द्वारा भेजी रचना मौलिक तथा स्वयं रचित जो कहीं से भी कॉपी पेस्ट नहीं है।

राजीव डोगरा, (भाषा अध्यापक), गवर्नमेंट हाई स्कूल ठाकुरद्वारा
पता-गांव जनयानकड़, पिन कोड -176038, कांगड़ा हिमाचल प्रदेश
9876777233, rajivdogra1@gmail.com

--Advertisement--
--Advertisement--

Share post:

Subscribe

--Advertisement--

Popular

More like this
Related

पेट्रोल के बाद डीजल भी महंगा, 22 रुपए बढ़े दाम, जानिए क्या होता है इंडस्ट्रियल डीजल

हिमखबर डेस्क  प्रीमियम पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद...

सरकार ने एसीएस श्याम भगत नेगी को सौंपा DGP का अतिरिक्त कार्यभार, जानें क्या है वजह

हिमखबर डेस्क  हिमाचल सरकार ने पुलिस प्रशासन के शीर्ष स्तर...

नशा सप्लाई करने की फिराक में था 24 वर्षीय युवक, पुलिस ने 51.92 ग्राम चिट्टे के साथ दबोचा

हिमखबर डेस्क  हिमाचल प्रदेश में नशे के सौदागरों के खिलाफ...