
भलाड़, शिवू ठाकुर
आजकल शायद ही कोई ऐसा शख्स मिले, जो सोशल मीडिया का इस्तेमाल नहीं करता हो। फेसबुक एक ऐसा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म है, जो सबसे ज्यादा पॉपुलर है। आपको बता दें कि फेसबुक अब इतना भी सोशल नहीं रहा है जितना हम समझते हैं। दरअसल, फेसबुक का वीडियो वाला विंडो खोलते ही अश्लील वीडियो व चित्र दिखने लगते हैं। उन्हें देखकर शर्मिंदगी भी महसूस होती है।
सबसे बड़ी बात ये है, वह सामग्री ग्राहकों पर ज़बरदस्ती थोपी जा रही है। फेसबुक यूजरों की मानें तो लाइक, फाॅलो व शेयर करने के बिना ही अश्लील सामग्री प्रस्तुत हो जाती है। फेसबुक व यूट्यूब सोशल मीडिया के ऐसे प्रमुख प्लेटफॉर्म हैं, जिनसे देश की बड़ी आबादी जुड़ी है। मौजूदा वक्त में हर वर्ग फेसबुक इस्तेमाल कर रहा है। अगर आपने गौर किया हो तो लाॅकडाउन के बीच और उसके बाद से ही फेसबुक पर अश्लील चित्रों-वीडियो की भरमार है। फेसबुक पर वीडियो वाले ऑपशन्स को टच करते ही अश्लील फोटोज व वीडियो अपने आप चलने लगते हैं, जबकि यूजर न लाइक करता है और न ही फाॅलो।
सोशल मीडिया पर परोसी जाने वाली गंदगी से किशोरों के मन पर बहुत ख़राब असर पड़ता है। कोरोनाकाल में ऑनलाइन पढ़ाई की आड़ में ये सब और आम हो गया है। पढ़ने-लिखने और करियर बनाने की उम्र में ही बच्चे अश्लील सामग्री की ओर आकर्षित हो रहे हैं। बच्चों में अश्लील सामग्रियों का प्रचलन तेजी से बढ़ रहा है। स्थिति बहुत गंभीर होती जा रही है।
समय की मांग यही है कि सोशल मीडिया से अश्लील सामग्री को पूर्णतः प्रतिबंधित किया जाए। इस गंदगी के खिलाफ समाज को भी उसे नकारने के लिए संकल्पित होना होगा। ऐसे वीडियो या फोटो को देखते ही उसकी रिपोर्ट फेसबुक को करें। ताकि फेसबुक इसका प्रसारण बंद करने पर मजबूर हो। इसके अलावा इस समस्या पर केंद्र सरकार को भी दखल देना होगा और तत्काल प्रभाव से अंकुश लगाने के प्रभावी उपायों पर विचार करना चाहिए।
