सदवां उपतहसील में 12 में से 11 पद खाली, स्टाफ की भारी कमी, पटवारी भवन से कार्यालय चल रहा है, लोगों को सरकारी कामों के लिए फिर नूरपुर जाना पड़ रहा है।
नूरपुर – स्वर्ण राणा
कांगड़ा जिले के नूरपुर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली सदवां उपतहसील सिर्फ कागजों में ही उपतहसील बनी हुई है। बोर्ड तो उपतहसील का लगा है, लेकिन यहां कानूगो स्तर की सेवाएं तक उपलब्ध नहीं हैं। पूरी व्यवस्था मात्र एक पटवारी के सहारे चल रही है।
पिछली सरकार ने इस उपतहसील की स्थापना तो कर दी, लेकिन बुनियादी सुविधाओं का अभाव बना रहा। इसे एक साधारण पटवार भवन में खोल दिया गया, लेकिन न तो आवश्यक पदों को भरा गया और न ही स्टैंप वेंडर, डॉक्यूमेंट प्रोवाइडर या टाइपिस्ट की व्यवस्था की गई।
वर्तमान में 12 स्वीकृत पदों में से 11 खाली पड़े हैं। यहां तक कि नायब तहसीलदार भी प्रमोशन के बाद स्थानांतरित हो चुके हैं। स्थिति यह है कि कांग्रेस सरकार के दो साल के कार्यकाल के बाद भी इस उपतहसील में सुविधाएं उपलब्ध करवाने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है, जिससे यह मात्र एक दिखावटी प्रशासनिक इकाई बनकर रह गई है।

स्थानीय लोगों ने प्रदेश सरकार से गुहार लगाई है कि सदवां उपतहसील में खाली पड़े पदों को जल्द से जल्द भरा जाए, ताकि जनता के काम बाधित न हों। शुरुआत में यहां नायब तहसीलदार की नियुक्ति की गई थी, लेकिन प्रमोशन के बाद यह पद भी रिक्त हो गया, जिससे लोगों की परेशानियां और बढ़ गई हैं।
तहसीलदार नूरपुर राधिका सैनी के बोल
तहसीलदार नूरपुर राधिका सैनी ने बताया कि उपतहसील से जुड़ी मांगों को लेकर उच्च अधिकारियों को सूचित कर दिया गया है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

