
भाम्बला- नरेश कुमार
उपमंडल सरकाघाट की बल्द्वाडा तहसील की ग्राम पंचायत सुलपुर जबोठ के सनैहरू गाँव में मंगत राम ठाकुर के घर में बीती रात को लगभग 10 बजे के करीब ब्रह्म कमल का फूल खिल उठा ! इतने साल बाद फूल खिलता देखकर उनका परिवार भी खुशी से खिल उठा।
करीब तीन घंटे के अंतराल के बाद करीब साढ़े 12 बजे ब्रह्म कमल पूरी तरह से मुरझा गया। इस पल को सबने करीब से देखा। ब्रह्म कमल का फूल खिलने की सुचना पाकर गाँव बाले रात को भी ब्रह्म कमल का फूल देखने के लिए पहुंच गये ! इलाके में पहली बार ब्रह्म कमल का फूल खिलने से लोग काफी खुश दिखे !
औषधीय गुणों से भरपूर
ब्रह्म कमल का फूल कई औषधीय गुणों से भरपूर होता है। इसे खिलता हुआ देखने मात्र से शरीर के कई रोग का नाश हो जाता है। ब्रह्म कमल की छाया वह इसकी खुशबू से शरीर की कई रोग नष्ट होते हैं।
मंगत राम ठाकुर का कहना है कि करीब 12 वर्ष पहले उन्होंने अपने घर में ब्रह्म कमल का पौधा लगया था । इनमें 12 वर्ष बाद पहली बार फूल खिला । उन्होंने कहा कि ब्रह्म कमल के फूल का हमारे धार्मिक ग्रंथों में काफी महत्व है। इसके अलावा इसका औषधीय महत्व भी काफी अधिक माना जाता है।
ब्रह्म कमल या ब्रह्म कमलम एक स्थानीय और दुर्लभ फूल वाले पौधे की प्रजाति है जो मुख्य रूप से भारतीय हिमालयी क्षेत्रों में पाई जाती है। फूल को ‘हिमालयी फूलों के राजा’ के रूप में भी जाना जाता है। स्टार जैसा दिखने वाला फूल दिखने में बहुत की खूबसूरत है।
ब्रह्मकमल का अर्थ ही है ‘ब्रह्मा का कमल’ कहते हैं और उनके नाम ही इसका नाम रखा गया है। ऐसा माना जाता है कि केवल भग्यशाली लोग ही इस फूल को खिलते हुए देख पाते हैं और जो ऐसा देख लेता है, उसे सुख और संपत्ति की प्राप्ति होती है। फूल को खिलने में 2 घंटे का समय लगता है। फूल मानसून के मध्य के महीनों के दौरान खिलता है। माना जाता है कि यह पुष्प मां नंदा का पसंदीदा फूल है। इसलिए इसे नंदा अष्टमी में तोड़ा जाता है।
