शिमला – नितिश पठानियां
हिमाचल प्रदेश में सड़कों की टारिंग की जांच होगी। इसके लिए विभाग ने जांच टीम गठित की है। अगर टारिंग की गुणवत्ता सही नहीं पाई गई तो अधिकारियों पर भी कार्रवाई होगी। इस वर्ष सरकार ने 2,000 किलोमीटर सड़कों पर टारिंग करने का लक्ष्य रखा है।
अगस्त तक टारिंग होनी है। कार्य की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए जूनियर इंजीनियर से लेकर अधिशासी अभियंता को टारिंग के समय फील्ड में तैनात रहने के निर्देश दिए गए है। टारिंग में गड़बड़ी पाए जाने पर ठेकेदारों की सिक्योरिटी जब्त होगी।
हिमाचल में बर्फबारी व बारिश कम होने से कई जिलों में सड़कों को कम नुकसान हुआ है। लाहौल स्पीति, मंडी, किन्नौर, चंबा और जिला शिमला के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी और बारिश से ज्यादा सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं। टारिंग के लिए आजकल मौसम बेहतर बताया जा रहा है। 30 डिग्री से अधिक तापमान टारिंग के लिए उपयुक्त माना जाता है।
लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह के बोल
लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने बताया कि हिमाचल में सड़कों की टारिंग का काम जोरों पर चल रहा है। राज्य, जिलों और गांव के संपर्क मार्गों में सड़कों की टारिंग की जा रही है। मौसम साथ देता है तो ज्यादा से ज्यादा सड़कों की टारिंग की जाएगी। टारिंग के समय लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को फील्ड में तैनात रहने को कहा गया है। कार्य में लापरवाही बरती गई तो कार्रवाई होगी।

