
व्यूरो रिपोर्ट
पड़ोसी देश श्रीलंका बर्बादी के कगार पर है। हालात इतने खराब हो गए हैं कि लोग मूल्क छोड़कर भारत में शरण लेने आ रहे हैं। महंगाई चरम पर है। लोग घर चलाने के लिए कर्ज ले रहे हैं। रोजमर्रा के सामान इतने महंगे हो गए हैं कि जनता 400 ग्राम दूध के लिए 790 रुपये चुका रही है। एक किलो शक्कर की कीमत 290 रुपये है। चावल आपको 500 रुपये प्रति किलो मिलेंगे। पेट्रोल-डीजल के रेट फिर बढ़ने लगे। भूख से मची त्राहि त्राहि के बीच लोग समुद्री रास्तों से, मछुआरों को पैसे देकर, भारत में प्रवेश कर रहे हैं।
भूख और बेरोजगारी से परेशान जनता तमिलनाडु के रास्ते भारत में पहुंच रहे हैं। मछुआरों ने उनसे 50 हजार से 3 लाख रुपये तक ले लिए। मंगलवार को करीब 16 श्रीलंकाई समंदर के रास्ते भारत पहुंचे। इन लोगों में चार महीने का एक नवजात भी शामिल था। श्रीलंका से भारत आए लोगों का कहना की वहां जीना मुश्किल हो गया है। जरुरी सामान की कीमतें बढ़ती ही जा रही हैं।
जनवरी में श्रीलंका का विदेशी मुद्रा भंडार 70% घटकर 2।36 अरब डॉलर रह गया है। श्रीलंका को अगले 12 महीनों में 7.3 अरब डॉलर (करीब 54,000 करोड़ रुपए) का घरेलू और विदेशी कर्ज चुकाना है। इसमें कुल कर्ज का लगभग 68% हिस्सा चीन का है। चीन का श्रीलंका पर 5 अरब डॉलर से अधिक कर्ज है। पिछले साल उसने देश में वित्तीय संकट से उबरने के लिए चीन से और 1 अरब डॉलर का कर्ज लिया था। अगले 12 महीनों में देश को घरेलू और विदेशी लोन के भुगतान के लिए करीब 7.3 अरब डॉलर की जरूरत है।
भारत ने संकट के समय श्रीलंका को मदद देने की घोषणा की है। भारत ने पड़ोसी देश को 90 करोड़ डॉलर से ज्यादा का कर्ज देने की घोषणा की है। जिससे श्रीलंका की मुद्रा भंडार को थोड़ी राहत मिलेगी।
