‘शिक्षा में सराहनीय काम…बहुत अच्छी छवि’, पूर्व BJP सांसद शांता कुमार ने सिसोदिया की गिरफ्तारी पर उठाए सवाल

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पालमपुर – नवीन शर्मा

हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और केन्द्रीय मंत्री और भाजपा सांसद रहे शांता कुमार ने दिल्ली के पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया की गिरफ्तारी पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि सिसोदिया ने शिक्षा के क्षेत्र में बहुत अच्छा काम किया है.

शांता कुमार ने कहा कि आम आदमी पार्टी ने केन्द्र की भाजपा सरकार की नाक के नीचे राजधानी दिल्ली में भाजपा को बुरी तरह से हराकर सरकार बनाई. पांच साल काम किया और दोबारा फिर सरकार बनाई.

11 साल पहले भ्र्ष्टाचार विरोधी आन्दोलन से जन्मी पार्टी की यह बहुत बड़ी उपलब्धि थी.  मनीष सिसोदिया साफ-सुधरी छवि वाले शानदार काम करने वाले उप मुख्यमंत्री के रूप में प्रसिद्ध हुए, लेकिन आज वह जेल में बन्द हैं.

उन्होंने कहा दोनों ओर से आरोप-प्रत्यारोप लग रहे हैं. यह सोचना भी बहुत कठिन है कि बिना किसी अपराध के सीबीआई ने सिसोदिया को जेल में डाला. सिसोदिया ने शिक्षा क्षेत्र में सराहनीय काम किया और बहुत अच्छी छवि बनाई है. इ

सके बाद भी वे भ्र्ष्टाचार के मामले में जेल में हैं, तो आज की परिस्थिति का  निचौड़ यही निकलता है कि भ्रष्टाचार की जड़ें इतनी गहरी हो गई है कि सदाचार के स्टेशन से चलने वाली हर गाड़ी अब भ्रष्टाचार के स्टेशन पर पहुंच रही है.

सीबीआई को कुछ नहीं मिला

शांता कुमार ने कहा एक और तथ्य भी गहरा विचारणीय है कि सिसोदिया के घर की पूरी तलाशी हुई और उनके बैंक लॉकर सब खंगाले  गए, लेकिन सीबीआई को कहीं कुछ नहीं मिला. कुल मिला कर उन पर आरोप यही है कि ऐसी शराब की नीति बनाई, जिससे व्यापारियों को लाभ हुआ.

इस में एक निष्कर्ष यह भी निकलता है कि ससोदिया व्यक्तिगत रूप से पूरी तरह ईमानदार हैं, लेकिन पार्टी और चुनाव के लिए धन इक्टठा करने के लिए यह सब कुछ किया होगा. मेरे विचार से यही सच है और यदि यह सच है तो देश को बड़ी गम्भीरता से कुछ नए निर्णय करने होंगे.

चुनाव में पैसों के इस्तेमाल पर भी सवाल

उन्होंने कहा 75 साल की आजादी के बाद आज भारत वहां पहुंचा है जहां हमारा लोकतंत्र काले धन और झूठ से शुरू होता है. चुनाव पर खर्च होने वाले करोड़ों अरबों रुपये केवल काला धन होता है. पार्टियां बड़े-बड़े व्यापारियों से धन लेती हैं. वे व्यापारी दान नहीं देते. सरकार की मदद से भ्रष्टाचार द्वारा अपना पैसा पूरा करते हैं.

भारत का लोकतंत्र इस प्रकार काले धन से शुरू होता है और चुनाव जीतने के बाद सभी प्रतिनिधि चुनाव आयोग के पास चुनाव मे खर्च होने का झूठा हिसाब पेश करते हैं. जिस देश का लोकतंत्र काले धन और झूठ से शुरू होता है उस देश में सब अच्छा कैसे हो सकता है.

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