शाहपुर के विधायक ने अपने फार्म में सहेजा पुरानी तोरी, करेला, कद्दू का बीज, बरसात में गेंदा भी बचाया
शाहपुर – नितिश पठानियां
शाहपुर में खेती के कैसे हाल हैं, इस सवाल का जवाब जानना हो, तो आप विधायक केवल सिंह पठानियां के खेतों का दौरा करके रैंडम सैंपलिंग कर सकते हो। बता दे कि, विधायक केवल पठानिया ने अपने खेतों में पारंपरिक, हाइब्रिड फसलों का कांबीनेशन बनाकर खेती और बागबानी का नया सफल प्रयोग किया है।
केवल सिंह पठानियां ने अपने फार्म में पारंपरिक घीया प्रजाति फसल की बेल लगाई है, जिसमें घीया – डानी खूब लहलहा रहे हैं। केवल सिंह पठानियां ने बताया कि पारंपरिक घीये, तोरी का सबसे बड़ा फायदा यह है कि उन्हें गर्मी और बरसात के लिए अलग-अलग बीज नहीं रोपना पड़ा। फरवरी-मार्च में लगाए बीज अब तक सब्जियां दे रहे हैं।
हालांकि पठानियां ने यह जरूर माना कि इस बार भिंडी थोड़ी कमजोर है, लेकिन इस सीजन में एक बार भी बाजार से भिंडी खरीदनी नहीं पड़ी। पठानियां ने खेतों के एक सिरे पर पुराना बारहमासी करेला भी उगाया है, जिसमें सबसे ज्यादा फसल है। इसके अलावा बाजरा, मंडल आदि मोटे अनाज को भी खेत में जगह दी है।
पठानियां ने कहा कि वह अपने पांच कनाल खेतों में उगी फसल कई विधायकों, मंत्रियों व आने-जाने वाली जनता को भेंट करते हैं। उन्होंने किसानों से आग्रह किया है कि बेशक वे हाइब्रिड भी लगाएं, लेकिन पारंपरिक सीड को बचाए रखें।
केवल सिंह पठानियां ने कहा कि आगामी समय में मोटे अनाज को प्रोमोट करना उनका लक्ष्य है। इसके लिए वह किसानों को ज्वार, बाजरा, मंडल, कांगणी का बीज देंगे। बतौर किसान केवल सिंह पठानियां ने कहा कि आसमानी बरसात का अपना ही महत्त्व है। इस बार बरसात कम होने से धान को पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आगामी दिनों में मानसून समेत वेस्ट्रन डिस्टर्बेंस से अच्छी बारिश होगी।

