सिरमौर – नरेश कुमार राधे
23 साल का युवक, अचानक ही 10 महीने पहले एक हादसे में हाथ एक गवां बैठता है। वो भी तब, जब उसने क्रिकेट में उच्च स्तर पर खेलने के सपना संजोए हुए था। ऐसा, होगा तो निश्चित तौर पर युवावस्था में नौजवान अवसाद का शिकार भी हो सकता है।
इसके विपरीत हिमाचल प्रदेश की रोनहाट उप तहसील की पनोग पंचायत के सिधोटी गांव के 23 वर्षीय शुभम शर्मा ने अवसाद को खुद पर हावी नहीं होने दिया, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में होने वाली क्रिकेट प्रतियोगिताओं में एक बेहतरीन खिलाड़ी के तौर पर पहचान बनाई है।
बल्लेबाजी करने के दौरान चौके-छक्के तो लगाता ही है, साथ ही एक बेहतरीन गेंदबाज भी है। यकीन नहीं करेंगे, गांव की पिच पर जब शॉट लगाकर शुभम रन के लिए दौड़ता है तो हर कोई टकटकी नजरों से देखता है। बेशक ही शुभम बड़े टूर्नामेंट न खेले, लेकिन बड़ी बात ये है कि हादसे का सामना करने के बाद डिप्रेशन में नहीं आया।
बता दें कि गिरिपार क्षेत्र में जनवरी व फरवरी के दौरान क्रिकेट के सीजन की खुमारी सिर चढ़कर बोलती है। 23 वर्षीय शुभम ने हाल ही में तीन क्रिकेट प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन किया।
शुभम के बड़े भाई रवि शर्मा ने बताया कि तकरीबन 10 महीने पहले शुभम को हादसे में एक हाथ गंवाना पड़ा था। क्रिकेट का बेहतरीन खिलाड़ी रहा। अच्छी बात ये है कि शुभम ने अपने जुनून को नहीं छोड़ा। वो आज भी ग्रामीण क्षेत्रों की क्रिकेट प्रतियोगिताओं में खेलता है। उन्होंने बताया कि दिव्यांगता के बावजूद भी शुभम घर के कार्यों में खासा हाथ बंटाता है, साथ ही पढ़ाई भी कर रहा है।
बहरहाल, शुभम शर्मा से उन युवाओं को प्रेरणा लेनी चाहिए, जो मामूली सी असफलता या फिर दिव्यांगता पर भी डिप्रेशन का शिकार हो जाते हैं।

