हिमखबर डेस्क
वर्ष 2027 में अग्निवीरों के पहले बैच का चार साल का कार्यकाल पूरा होने से पहले केंद्र सरकार ने राज्यों में रोजगार प्रावधान पर जोर दिया है।
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखकर अग्निवीरों के लिए सरकारी भर्तियों में कम से कम 20 फीसदी आरक्षण देने की सिफारिश की है। गृह मंत्री अमित शाह के नाम से जारी यह पत्र सीधे मुख्यमंत्रियों के नाम है।
पत्र में कहा गया है कि पूर्व सैनिकों की तर्ज पर अग्निवीरों को भी राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में अवसर दिए जाएं, जिससे 2027 में सेवा पूर्ण कर रहे पहले बैच को रोजगार के पर्याप्त विकल्प मिल सकें।
पत्र मिलने के बाद हिमाचल प्रदेश सैनिक कल्याण विभाग ने भी इस संबंध में प्रदेश सरकार को विस्तृत रिपोर्ट भेज दी है। अब अंतिम निर्णय राज्य सरकार के स्तर पर लिया जाएगा।
गृह मंत्रालय ने विशेष रूप से वनरक्षक, खनन गार्ड, पुलिस कांस्टेबल, फायरमैन, घुड़सवार पुलिस, जेल वार्डन, एसपीओ और एसडीआरएफ जैसे पदों में 20 फीसदी आरक्षण लागू करने की बात कही है।
उद्देश्य यह है कि अनुशासित और प्रशिक्षित अग्निवीरों की सेवाओं का लाभ राज्यों की कानून-व्यवस्था और आपदा प्रबंधन तंत्र को मिल सके। देश के कई राज्यों ने इस दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं।
हरियाणा वर्दीधारी सेवाओं में अग्निवीरों के लिए आरक्षण लागू करने वाला पहला राज्य बन चुका है। हरियाणा में पुलिस, माइनिंग गार्ड, जेल वार्डन, एसपीओ और ग्रुप-सी पदों में प्रावधान किया गया है।
उत्तराखंड ने भी पुलिस व अन्य वर्दीधारी सेवाओं में आरक्षण लागू करने की घोषणा की है। वीरभूमि के नाम से पहचाने जाने वाले हिमाचल प्रदेश में बड़ी संख्या में युवा तीनों सेनाओं में अग्निवीर के रूप में सेवाएं दे रहे हैं।
ऐसे में पहले बैच के लौटने पर उनकी रोजगार संभावनाएं प्रदेश सरकार के फैसले पर निर्भर रहेंगी। हालांकि, केंद्र ने अर्धसैनिक बलों में अवसर का प्रावधान पहले ही किया है, लेकिन राज्य सेवाओं में आरक्षण से युवाओं को और विकल्प मिलेंगे।
ब्रिगेडियर मदनशील शर्मा (सेवानिवृत्त), निदेशक, सैनिक कल्याण विभाग, हिमाचल प्रदेश के बोल
गृह मंत्रालय से पत्र प्राप्त हुआ है। पत्र में वर्ष 2027 में कार्यकाल पूरा कर रहे अग्निवीरों को राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में 20 फीसदी आरक्षण लागू करने की सिफारिश की गई है। इस संबंध में राज्य सरकार को विस्तृत रिपोर्ट भेजी गई है।

