हिमखबर डेस्क
पत्रकार छत्रपति हत्याकांड मामले में उमर कैद की सजा काट रहे डेरा सच्चा सौदा प्रमुक गुरमीत राम रहीम को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने इस मामले से बरी कर दिया, जबकि अन्य तीन दोषियों कुलदीप, निर्मल और किशन लाल की सजा बरकरार रखी गई है।
बता दें इन सभी को इस मामले में सीबीआई अदालत ने दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। बता दें कि सिरसा के पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की 24 अक्तूबर 2002 को उनके घर के बाहर गोली मार दी गई थी।
21 नवंबर को उनकी मौत हो गई। अगस्त 2002 में अज्ञात पत्र में डेरा की साध्वियों के साथ यौन शोषण और दुष्कर्म के आरोप लगाए गए थे। छत्रपति ने इस पत्र को अपने अखबार में प्रकाशित किया था।
2003 में छत्रपति के बेटे अंशुल छत्रपति की याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने जांच सीबीआई को सौंपी थी। नवंबर 2003 में हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने एफआईआर दर्ज की।
2004 में डेरा सच्चा सौदा ने यह जांच रुकवाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दाखिल की थी, पर सुप्रीम कोर्ट ने यह याचिका खारिज कर दी। करीब 16 साल इस केस की सुनवाई पंचकूला की स्पेशल सीबीआई कोर्ट में चली।
सीबीआई ने 2018-2019 में केस में चार्जशीट दाखिल की। कोर्ट ने इसे सुनियोजित साजिश करार देकर राम रहीम, कुलदीप सिंह, निर्मल सिंह और कृष्ण लाल को दोषी करार दिया।
गुरमीत राम रहीम ने 2019 के फैसले के खिलाफ अपील दायर की थी। इसमें आज हाईकोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया। गुरमीत राम रहीम दो साध्वियों के साथ दुष्कर्म मामले में 20 साल की सजा काट रहे हैं। वे वर्तमान में रोहतक की सुनारिया जेल में बंद हैं।
बता दें सिरसा के पत्रकार रामचंद्र छत्रपति को अक्तूबर 2002 में उन्हें उनके घर के बाहर गोली मारी गई थी। 21 नवंबर 2002 को उनकी मौत हो गई। 2019 में सीबीआई कोर्ट ने राम रहीम को मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

