मंडी के प्रथम लिटरेचर फेस्टिवल ‘छोटी काशी साहित्य उत्सव’ का सफल आयोजन

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प्रसिद्ध लेखक राजा भसीन ने किया उद्घाटन, पांच साहित्यिक सत्रों और गजल संध्या ने बांधा समां।

हिमखबर डेस्क 

अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव के अंतर्गत संकन गार्डन में आयोजित मंडी के प्रथम लिटरेचर फेस्टिवल “छोटी काशी साहित्य उत्सव” का सफल आयोजन हुआ।

कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन से हुई तथा प्रसिद्ध लेखक राजा भसीन ने उत्सव का विधिवत उद्घाटन किया। उपायुक्त अपूर्व देवगन इस अवसर पर विशेष रूप से उपस्थित रहे।

मुख्य अतिथि राजा भसीन ने अपने संबोधन में कहा कि कला, इतिहास, परंपराएं और आस्थाएं मिलकर वह सृजन करती हैं, जिसे आज हम साहित्य के रूप में जानते हैं।

साहित्य केवल लेखन का माध्यम नहीं, बल्कि सत्य तक पहुंचने की एक खिड़की है। यह भविष्य की ओर देखने का दृष्टिकोण देता है और अतीत को समझने का अवसर भी प्रदान करता है।

उन्होंने कहा कि मंडी के 500 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर इस प्रकार की साहित्यिक पहल अत्यंत उपयुक्त है। अपनी जड़ों और विरासत से जुड़े रहकर भविष्य की ओर अग्रसर होना ही वास्तविक प्रगति है।

उन्होंने कहा कि संस्कृति समय के साथ विकसित होती है, जबकि इतिहास प्रमाणों के आधार पर लिखा जाता है। बिना प्रमाण के वह केवल विश्वास माना जाता है। कला, इतिहास और आस्था का समन्वय ही किसी स्थान की पहचान बनाता है।

उन्होंने इस पहल को सराहनीय बताते हुए कहा कि शुरुआत भले ही छोटी हो, लेकिन मंडी की पहचान बड़ी है और यह प्रयास भविष्य में और विस्तार पाएगा।

दिन भर चले विविध साहित्यिक सत्र

उत्सव के अंतर्गत पांच साहित्यिक सत्र आयोजित किए गए। प्रथम सत्र में मंडयाली लोक साहित्य एवं समकालीन साहित्य विषय पर सार्थक चर्चा हुई। इस सत्र के संयोजक कृष्ण चंद महादेविया रहे और मुरारी शर्मा, डॉ. रेखा वशिष्ठ तथा डॉ. विजय विशाल ने अपने विचार रखे।

दूसरे सत्र में कैमरा, मंडी कलम और रंगमंच के माध्यम से मंडी की कलात्मक अभिव्यक्ति पर संवाद हुआ। इसके संयोजक डॉ. राकेश शर्मा रहे और बीरबल शर्मा, रमेश रवि, सीमा शर्मा तथा राजेश कुमार ने अपने विचार साझा किए।

तीसरे सत्र में “किस्सों की विरासत -लोक कथा से बाल कथा तक” विषय पर बाल साहित्य के महत्व पर विचार-विमर्श किया गया। इस सत्र के संयोजक पवन चौहान रहे और प्रतिभागियों में कृष्ण चंद महादेविया, सीमा शर्मा तथा मुरारी शर्मा शामिल रहे।

चौथे सत्र में “युवा, लेखन और मानसिक स्वास्थ्य” विषय पर गहन चर्चा हुई। इस सत्र के संयोजक शिवम त्यागी रहे और पृथी पाल, जीवन पठानिया, सुषांत तथा अनीता ठाकुर ने अपने विचार व्यक्त किए।

पांचवें सत्र में “हिमाचली लोक साहित्य और भाषा” विषय पर पारंपरिक शैलियों और भाषाई विरासत पर विमर्श किया गया। इसमें कुलदीप गुलेरिया संयोजक रहे, जबकि जगदीश कपूर, विनोद बहल, प्रकाश चंद धीमान, राकेश कपूर और सत्य महेश ने अपने विचार रखे।

इसके अतिरिक्त साहित्य क्विज प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

सत्र का समापन उपायुक्त एवं शिवरात्रि महोत्सव समिति के अध्यक्ष अपूर्व देवगन ने किया। उन्होंने कहा कि मंडी के रचनाकारों को प्रदेश सहित देशभर के साहित्य जगत में सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है।

यहां के लेखकों ने अपनी कृतियों से न केवल इस ऐतिहासिक नगर की विरासत को जीवंत बनाए रखा है, अपितु यहां के इतिहास, लोक संस्कृति, परंपराओं व लोकजीवन से जुड़े विविध पहलुओं पर भी अपनी कलम बखूबी चलाई है। उन्होंने विश्वास जताया कि आगामी वर्षों में यह उत्सव मंडी की सांस्कृतिक विरासत में नए आयाम स्थापित करेगा।

ये रहे उपस्थित 

इस अवसर पर अतिरिक्त उपायुक्त गुरसिमर सिंह, एडीएम डॉ. मदन कुमार, जिला पंचायत अधिकारी अंचित डोगरा सहित साहित्यकार और अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

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