भूख नहीं हे कुर्सी की, न ही सत्ता पाने की
जनता की इतनी सेवा की यह जरूरत नहीं गिनबाने की
लोगो के तो तेवर हे ,शाहपुर का तो केवल हे
जो भी कार्य किया अपना कर्म समझ कर ,जनता के वादों को निभाया अपना धर्म समझ कर।
कोई किसी के साथ खड़ा न होता दो पल भी ,यह कोसो दूर पैदल चलता रहा टूटे हुए घरों को अपना समझ कर
लुटेरों ने तो इकट्ठे किये जेवर हे, गरीवो के पास तो केवल हे
कोई घोटालों में फसा है, किसी को सत्ता का नशा हे ।
सबने विकास कार्यों से मुंह मोड़ रखा है l
यही शाहपुर की दशा हे ,
शाहपुर को हक दिलवाना है
तो केवल के संग जाना हे ।
सत्ता में न रहकर भी बहुत कुछ किया हे ,
जनता को उसका हक़ दिया हे ।
इस बार सत्ता में लाकर दिखाएंगे ,
शाहपुर का भाग्य चमकायेंगे,
लुटेरों ने तो इकट्ठे किये जेवर हे l
गरीवो के पास तो केवल हे
मर्द हो या जनानिया ,
इबकी बारी केवल पठानियाँ
लेखक
सुरेंदर सिंह चौहान
दरगेला
Ph.72260-15595