
व्यूरो रिपोर्ट
हिमाचल प्रदेश में हुई पुलिस भर्ती प्रक्रिया एक बार फिस से सवालों के घेरे में आ गई है और लंबे प्रोसेस और महीन सुरक्षा पर खर्च किये गये लाखों रुपयों के बावजूद फिर से सरकारी तंत्र की असफलता का खामियाजा प्रदेश के सैकड़ों नहीं बल्कि हजारों युवाओं को भुगतना पड़ सकता है।
दरअसल कांगड़ा पुलिस ने इस पूरी भर्ती प्रक्रिया के मुकम्मल हो जाने के आखिरी चरण में गग्गल पुलिस थाना में इस पूरी प्रक्रिया में धारा 420 और 120 बी के तहत मामला दर्ज करते हुये इस बात का संकेत दे दिया है कि इस भर्ती प्रक्रिया में बड़े स्तर पर गड़बड़झाला हुआ है।
इतना ही नहीं पूरे मामले में पुलिस ने फिलहाल तीन अभ्यर्थी युवकों और एक उस शख्स को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है जिस पर इन युवकों को दिल्ली और हरियाणा में बैठे शातिरों के साथ मिलान करवाया था और इस पूरे वाक्यात को अंजाम दिया था।
जानकारी के मुताबिक प्रदेश में 1334 पुलिस पदों के लिये भर्ती प्रक्रिया का संचालन किया गया था। जिसके लिये 27 मार्च को ली गई इस भर्ती की लिखित परीक्षा का परिणाम 5 अप्रैल को घोषित किया गया था। जिसमें समूचे प्रदेश से 74 हजार उम्मीदवार शामिल हुये थे। परिणाम की घोषणा के बाद इन दिनों उनके दस्तावेजों के मिलान का प्रोसीजर चल रहा है।
इसी बीच पुलिस को कुछ युवकों के दस्तावेजों के मिलान के बाद संदेह हुआ कि इनके मैट्रिक में पचास फीसदी से कम अंक हैं जबकि पुलिस भर्ती की लिखित परीक्षा में इन्होंने 90 में से 70 अंक हासिल किये हैं। जिस पर पुलिस मुलाजिमों ने उनके साथ सख्ती से पूछताछ की तो जो उन्होंने खुलासा किया उससे सबके पैरों तले जमीन खिसक गई और मालूम पड़ा कि इन युवकों ने पहले ही प्रश्नपत्र हासिल कर लिये थे और उनके जबाव रट रखे थे।
जब पेपर शुरू हुआ तो इन्होंने ज्यादा अंक हासिल कर परीक्षा पास कर ली थी। इस पर पुलिस ने गहनता से पूछताछ के बाद ये भी पाया कि इन्होंने मोटी रकम देकर ये प्रश्नपत्र हासिल किये थे।
हालांकि कांगड़ा पुलिस के अधीक्षक खुशहाल शर्मा की मानें तो अभी इस बाबत इन आरोपियों ने किसी भी तरह का खुलासा नहीं किया है। मगर ये सच है कि इन्होंने मोटी रकम देकर ही ये काम किया होगा।
पूछताछ के बाद तीन युवकों और एक अन्य आरोपी शख्स को गिरफ्तार किया गया है। जिन्हें जल्द ही अदालत में पेश कर पुलिस रिमांड पर लिया जायेगा और आगे की कार्रवाई शुरू की जाएगी।
काबिले गौर है कि इससे पहले भी कांगड़ा में पुलिस भर्ती प्रक्रिया में बड़ा गड़बड़झाला सामने आया था और पुलिस ने आरोपियों को दिल्ली और दूसरे राज्यों से गिरफ्तार किया था। इस बार भी इस मामले में कुछ ऐसे ही तार जुड़ रहे हैं।जिसके लिये एसपी कांगड़ा ने अपने अधिकारियों की टीमों का गठन किया है जो कि इस मामले की तह तक जाकर जांच को आगे बढ़ाने का काम करेगी।
सवाल ये खड़ा होता है कि जब पुलिस ने पुलिस भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शिता के साथ संकल्प लिया था तो फिर इसमें चूक कहां हुई।
इस कारण हुआ पुलिस को शक
एसपी ने बताया कि अभ्यर्थियों ने ठाकुर कांशीराम स्कूल चैतड़ू में बनाए केंद्र में पेपर दिए थे। दलालों ने और कितनों को पेपर बेचे हैं, इसकी भी जांच तेज हो गई है। 5 अप्रैल को लिखित परीक्षा का परिणाम निकलने के बाद पास हुए अभ्यर्थियों को पुलिस ने दस्तावेजों की जांच के लिए प्रदेशभर में बुलाया।
इसके बाद नियुक्ति होनी थी। दस्तावेजों की जांच के दौरान एसपी कांगड़ा को तीन युवाओं पर शक हुआ। तीनों युवाओं के 90 में से 70 अंक थे। लेकिन दसवीं की कक्षा में उनके अंक 50 फीसदी भी नहीं थे।
एसपी ने तीनों युवाओं से अलग-अलग कड़ी पूछताछ की। पुलिस पूछताछ में तीनों युवा फंस गए और उन्होंने माना कि लिखित परीक्षा से पहले ही 6 से 8 लाख रुपये देकर उन्हें टाइप्ड प्रश्नों के उत्तर मिल गए थे। उन्हें उत्तर रटने को कहा गया था।
