
व्यूरो, रिपोर्ट
(“यूथ डेव्लपमेंट सेंटर” द्वारा “भारतीय संस्कृति एवं आयुर्वेद” विषय पर वर्चुअल संगोष्ठी)
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“कोरोना वायरस संक्रमण की जंग से लोगों की जीवनशैली में बदलाव आया है। हर कोई अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में जुटा है, ताकि कोरोना के साथ-साथ अन्य बीमारियों से भी बचाव हो सके। प्रतिरोधक क्षमता के प्रति लोगों में तेजी से जागरूकता बढ़ी है। इससे कोरोना ही नहीं, कई अन्य बीमारियों को दूर किया जा सकता है।
पहले जो लोग सुबह अपने दिन की शुरुआत काफी व चाय की चुस्की से करते थे, वह अब आयुर्वेदिक देसी काढ़ा उनकी पहली पसंद बन गया है। “ उक्त विचार उधयोगपति बलविंदर सिंह ने “यूथ डेव्लपमेंट सेंटर” द्वारा सीमांत गाँव बाड़ी में “भारतीय संस्कृति एवं आयुर्वेद” विषय पर आयोजित वर्चुअल संगोष्ठी में व्यक्त किए ।
इस अवसर पर संगठन के निर्देशक कर्ण भूषण ने बताया कि कोरोना काल में लोगों का विश्वास आयुर्वेद के प्रति बढ़ गया है। शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली तुलसी, गिलोय, अश्वगंधा व दालचीनी की मांग में इजाफा हुआ है। आयुर्वेदिक औषधियां व घरेलू नुस्खे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में पूरी तरह से कारगर हैं।
प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाकर हमारा शरीर कोरोना जैसी महामारी से लड़ने में सक्षम हो जाता है। वहीं आयुर्वेद दवा से बनाया हुआ काढ़ा दिन में कम से कम एक बार पीने से व्यक्ति काफी हद तक कोरोना वायरस के संक्रमण से बच सकता है।
उन्होने जनसमुदाय से औषधीय पौधे घरों में लगाने का आह्वान करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में औषधीय पौधों के राजा’-एलोवेरा, औषधीय पौधों की रानी- तुलसी, पुदीना, गिलोय, अश्वगंधा, मेथी, सौंफ, धनिया, अदरक, नीम, ब्राह्मी, करीपत्ता, भुई आंवला, करेला, जामुन, बहेड़ा व दालचीनी आदि घरों में लगाने की प्रथा रही है । वर्तमान में इनके महत्व को देखते हुए हम सब को इन पौधों को हर घर में लगाना चाहिए ।
