पौंग झील में प्रवासी पक्षियों की आमद से झील होने लगी गुलजार, प्रवासी परिंदों की सुरक्षा को वन्य प्राणी विभाग मुस्तैद।
ज्वाली – अनिल छांगू
हिमाचल प्रदेश में सर्दी का मौसम शुरू होते ही रामसर वैटलैंड पौंग झील में बाहरी देशों से प्रवासी पक्षियों का आगमन भी शुरू हो गया है।
विदेशों में ज्यादा ठंड होने के कारण जब झीलें, नदियां वर्फ़ में तबदील हो जाती हैं तो विदेशी परिंदे हिमाचल प्रदेश की झीलों की तरफ रुख करते हैं।
पौंग झील प्रवासी पक्षियों के लिए पसंदीदा बनी हुई है क्योंकि हर वर्ष इस झील में प्रवासी पक्षियों की आमद बढ़ती ही जा रही है। कुछेक प्रजाति के पक्षियों ने तो झील में ही डेरा जमा रखा है जोकि यहीं पर प्रजनन करते हैं। अपने वतन को वापस नहीं जाते हैं।

प्रतिवर्ष विदेशी परिंदों की संख्या में इजाफा होता है। प्रवासी पक्षी अक्तूबर माह के अंतिम सप्ताह में यहां आते हैं तथा अप्रैल माह तक डेरा जमाए रखते हैं। इस वर्ष झील में काफी ज्यादा पानी है जिस कारण इस वर्ष ज्यादा प्रवासी पक्षियों के आने की उम्मीद है।
पौंग झील में न्यूजीलैंड, साउथ अफ्रीका, इंग्लैंड, नाइजीरिया, थाईलैंड इत्यादि देशों से प्रवासी पक्षी हजारों मील का सफर तय करके पौंग झील में पहुंचते हैं।
वर्ष 2022-23 में 108 प्रजातियों के करीबन सवा लाख प्रवासी पक्षी झील में पहुंचे थे। गत वर्ष लंबी पूंछ वाली बतख भी झील में देखी गई थी।
प्रवासी पक्षियों की सुरक्षा को लेकर वन्य प्राणी विभाग भी मुस्तैद हो गया है। वन्य प्राणी विभाग ने प्रवासी पक्षियों की सुरक्षा के लिए टीमों का गठन कर दिया है तथा इसके अलावा दूरबीन से भी नजर रखी जाएगी।
झील के किनारे होने वाली खेती की आड़ में प्रवासी पक्षियों का शिकार भी चोरी-छिपे कर लिया जाता था। खेती में जाल लगाकर या दवाई डालकर इनका शिकार कर लिया जाता था लेकिन अब वन्य प्राणी विभाग ने झील किनारे खाली जमीन पर होने वाली खेती पर पूर्णतया प्रतिबन्ध लगा दिया है।

मछुआरों के चेहरे मुरझाए
पौंग झील में प्रवासी पक्षियों की आमद से मछुआरों की चिंता बढ़ गई है। प्रवासी पक्षी मांसाहारी होने के कारण झील में पल रही एक से डेढ़ किलोग्राम की मछली को अपना आहार बना लेते हैं।
मछुआरों के जालों में फंसी हुई मछलियों को भी चट कर जाते हैं जिससे मछली उत्पादन कम हो जाता है और मछुआरों को रोजी-रोटी के लाले पड़ जाते हैं।
मछुआरों को रोजाना झील में जाकर खाली हाथ लौटना पड़ता है। पौंग झील में करीबन 2300 मछुआरे हैं जोकि प्रवासी पक्षियों की आमद से आहत हैं।
वर्ष दर वर्ष प्रवासी पक्षियों की संख्या
वर्ष 2022-23 —– 1,17,022
वर्ष 2021-22 ——- 1,10,205
वर्ष 2020-21 —— 1,09,154
वर्ष 2019-20 ——- 1,08,578
वर्ष 2018-19 —— 1,15,229
वर्ष 2017-18 —— 1,10,203
झील में पहुंचने वाली पक्षियों के नाम
कॉमनटील, हैडिड गीज, गढ़वाल, ब्लैक गुल्ल, नार्दन पिंटल, ग्रेट कारमोरेंट, लेसर व्हाइट, कॉमन पोचार्ड, लिटिल कारमोरेंट इत्यादि प्रजातियों के पक्षी झील में आते हैं।
क्या कहते हैं डीएफओ रेजीनोड रॉयस्टोन
इस बारे में वन्य प्राणी विभाग हमीरपुर के डीएफओ रेजीनोड रॉयस्टोन ने कहा कि प्रवासी पक्षियों की सुरक्षा के लिए वन्य प्राणी विभाग तैयार है। टीमों का गठन कर लिया गया है जोकि दिन-रात प्रवासी पक्षियों पर निगरानी रखेंगी।
इसके अलावा दूरबीन से भी नजर रखी जाएगी। उन्होंने कहा कि अगर कोई प्रवासी पक्षी का शिकार करता पाया गया तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

