पुरातन जीवन शैली को जीवित रखने के लिए वनविभाग ने की अनूठी पहल, घराट से रूबरू होंगे सैलानी

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कुल्लू- मनदीप सिंह

पर्यटन नगरी कुल्लू मनाली में शुमार पर्यटन स्थलों में अब बिहाल नेचर पार्क में घराट (पनचक्की) से भी सैलानी रूबरू हो सकेंगे। वन विभाग ने यहां पर तीन करोड़ की लागत से नेचर पार्क तैयार किया जा रहा है। इस नेचर पार्क का क्षेत्र 13 हेक्टेयर भूमि पर फैला है। इसमें कई प्रकार की कलाकृतियां तैयार की गई है। नेचर पार्क में पुरातन शैली का घराट स्थापित किया है। यह प्रदेश का पहला ऐसा नेचर पार्क होगा जहां पर आने वाली पीढ़ी पुरातन संस्कृति से रूबरू होगी।

आज के दौर में विलुप्त हो रहे घराट को नई पीढ़ी को देखने को भी नहीं मिलेगा। इसका संचालन कैसे होता था और कैसे गेंहू की पिसाई होती है इसका डेमो दिखाया जाएगा। इसके लिए पुराने घराट जो बंद पड़ा हुआ है उसका सामान लाकर नेचर पार्क में तैयार किया गया है। अब नेचर पार्क को निहारने वाले सैलानियों इससे रूबरू होंगे। नेचर पार्क में आने वाले सैलानी प्रकृति को करीब से समझने के साथ ही वहां से कुछ ज्ञान लेकर भी जाएं, इसी थीम पर इसे आगे बढ़ाया जा रहा है। इसी क्रम में नेचर पार्क में परंपरागत घराट स्थापित किया है।
घराट क्या है
यह एक प्रकार की पनचक्की है, जिसका उपयोग गेहूं, जौ आदि की पिसाई के लिए किया जाता रहा है। परंपरागत घराट तब से प्रचलित हैं, जब किसी ने गेहूं की पिसाई के लिए वैकल्पिक ऊर्जा के बारे में सोचा भी नहीं होगा। सुदूरवर्ती गांवों में आज भी वहां से निकलने वाली जलधाराओं से घराट को चलाया जाता है।


कैसे करता है यह कार्य

पानी का तीव्र वेग घराट की चक्की को घुमाने वाले पंखे (फितौड़) के ऊपर गिरता है, जिससे घराट का पत्थर घूमता है। पनचक्की में अनाज डालने के लिए लकड़ी या धातु के बने ओखलीनुमा वस्तु में डाला जाता है और पानी के दबाब से घराट का पत्थर घूमता है और अनाज की पिसाई होने लगती है। घराट बारीक से बारीक अनाज को पीसने में सक्षम होता है। अनाज को डोकची से गिराने के लिए लकड़ी के गुटकों को घूमते पत्थरों के ऊपर रखा जाता है जिनके कंपन से अनाज चक्की में बने छेद में गिरता है।

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