
पठानकोट मंडी के तहत कंडवाल से सियूणी तक प्रस्तावित फोरलेन के मसले को लेकर अब वन मंत्री राकेश पठानिया व पूर्व विधायक अजय महाजन के बीच तकरार शुरू हो गई है। मुद्दा फोरलेन प्रभावितों को मुआवजा दिलाने का है।
नूरपुर- देवांश राजपूत
पठानकोट मंडी के तहत कंडवाल से सियूणी तक प्रस्तावित फोरलेन के मसले को लेकर अब वन मंत्री राकेश पठानिया व पूर्व विधायक अजय महाजन के बीच तकरार शुरू हो गई है। मुद्दा फोरलेन प्रभावितों को मुआवजा दिलाने का है हालांकि जसूर संघर्ष समिति काफी पहले से ही इस मामले को उठाती आ रही है और उसके बाद अजय महाजन ने भी उनका साथ देते हुए उनकी मांग का समर्थन दिया था कि उचित मुआवजा उन्हें मिले।
मामले के बढ़ते तूल को देखकर वन मंत्री राकेश पठानिया ने भी पिछले दिनों यह ऐलान कर दिया कि फोरलेन प्रभावितों को उचित मुआवजा दिलाने के लिए वह सरकार के समक्ष अपना पक्ष रखेंगे। हालांकि न तो कांग्रेस और न ही भाजपा इस मुद्दे को लेकर पूरी तरह से गंभीर है पर आने वाले विधानसभा चुनावों के लेकर दोनों ही नेता इस मौके को हाथ से जाने नहीं देना नहीं चाहते हैं। क्योंकि काफी लोग इससे प्रभावित ही होंगे और उनके वोट बैंक पर भी कहीं न कहीं असर पड़ेगा। इसे देखते हुए अब फोरलेन का मामला पूरी तरह से सुर्खियों में है जिसे लेकर वन मंत्री राकेश पठानिया व पूर्व विधायक अजय महाजन आमने सामने हैं।
फोरलेन परियोजना का प्रारूप बदलने के आरोप पर महाजन ने कहा है कि उस समय तो परियोजना की सुगबुगाहट ही शुरू हुई थी। 2018 में पहली नोटिफिकेशन जारी हुई थी। 2019 में शाहपुर में केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्री ने फोरलेन परियोजना का शिलान्यास किया और 2020 में मुआवजे संबंधित अवार्ड घोषित किए थे। अब जब फोरलेन प्रभावितों की आवाज उठानी चाहिए तो ऐसे में मंत्री सरकार का अंग होने के बावजूद चुप क्यों हैं।
वहीं, शाहपुर संघर्ष समिति ने फोरलेन प्रभावितों का मामला प्रधान सचिव राजस्व विभाग ओंकार शर्मा के समक्ष मामला उठाया है। ऐसे में फोरलेन के मामले में अजय महाजन व राकेश पठानिया आमने साने आ गए हैं तो वहीं शाहपुर में भी इसके विरोध में आवाज बुलंद होने शुरू हो गई है।
