हिमखबर डेस्क
कांगड़ा घाटी रेलवे संघर्ष समिति के अध्यक्ष पीसी विश्वकर्मा ने रेलवे बोर्ड और मंत्रालय पर पठानकोट-जोगिंद्रनगर रेलमार्ग की बहाली को लेकर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया है।
उन्होंने कहा कि पंचरुखी स्टेशन की स्थिति सुधारने जैसे छोटे कार्यों के नाम पर मुख्य समस्या यानी ट्रेनों के संचालन से ध्यान भटकाया जा रहा है।
कांगड़ा घाटी के लोगों के लिए रेल सेवाओं की बहाली सबसे बड़ी प्राथमिकता है, जिसे नजरअंदाज किया जा रहा है। विश्वकर्मा ने कहा कि इस मार्ग की सबसे बड़ी बाधा चक्की खड्ड पुल का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है।
उत्तर रेलवे सुरक्षा आयुक्त ने 24 फरवरी को रेल ट्रैक और पुल का विस्तृत निरीक्षण कर इसे ट्रेनों के संचालन के लिए उपयुक्त घोषित कर दिया था।
इसके बावजूद रेल सेवाएं शुरू न होना विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक दखलंदाजी के चलते जानबूझकर हिमाचल के लोगों को परेशान किया जा रहा है।
संघर्ष समिति ने रेलवे बोर्ड को एक सप्ताह का अल्टीमेटम दिया है। यदि तय समय में पठानकोट से बैजनाथ तक ट्रेन सेवा बहाल नहीं की गई तो समिति उग्र आंदोलन शुरू करेगी। इस दौरान यदि रेलवे संपत्ति को कोई नुकसान होता है, तो उसकी जिम्मेदारी बोर्ड की होगी।
विवेक कुमार, डीआरएम, मंडल रेलवे जम्मू के बोल
रेलबे बोर्ड 5 अप्रैल से 10 अप्रैल के बीच इस रेलमार्ग पर ट्रेनों की बहाली करने की पूरी कोशिश कर रहा है। तकनीकी और प्रशासनिक पहलुओं को जल्द अंतिम रूप दिया जा रहा है।

