ना घर बचा-ना जमीनः राहत शिविर में कट रही 8 माह की गर्भवती मनमोहिनी की जिंदगी, अगले माह है डिलीवरी

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मंडी, 06 सितंबर – अजय सूर्या

हिमाचल प्रदेश में आई आपदा ने कईयों को घर से बेघर कर दिया है। बहुत से लोग ऐसे हैं जिनके पास तन पर ढखे कपड़ों के सिवाय और कुछ भी नहीं बचा है। यह लोग अब प्रशासन की तरफ से लगाए गए राहत शिविरों में दिन काट रहे हैं।

राहत शिविरों में दिन काट रहे लोगों में एक महिला ऐसी भी है जो 8 माह की गर्भवती है और यह महिला कलखर स्कूल में लगाए गए राहत शिविर में रहने को मजबूर है। महिला का नाम है मनमोहनी।

मनमोहिनी और उसके पति ओम दत्त का घर गुम्हू गांव में था जो बीती 13 और 14 अगस्त को आई त्रासदी में ढह गया। इस परिवार के पास तन पर ढखे कपड़ों के सिवाय और कुछ भी शेष नहीं है। मनमोहनी 8 माह की गर्भवती है और अगले महीने की 11 तारीख को उसकी डिलीवरी की तारीख बताई गई है।

यह मनमोहनी का पहला बच्चा है। ऐसी स्थिति में जहां मनमोहनी को उचित देखभाल और बेहतरीन पोषाहार की जरूरत थी, वहीं वो स्कूल के एक कमरे में अन्य लोगों के साथ जिंदगी काटने को मजबूर है।

मनमोहनी के पति ओम दत्त को शंका है कि कहीं उसकी पत्नी की डिलीवरी स्कूल में ही न हो जाए। साथ ही यह चिंता भी सता रही है कि अगर डिलिवरी अस्पताल में भी हुई तो उसके बाद भी उन्हें अपने नवजात को लेकर स्कूल में ही आना पड़ेगा। क्योंकि न घर बचा है और न ही जमीन।

ऐसे में वो खुद का अपने नवजात का ध्यान कैसे रख पाएंगे। इन्होंने सरकार से मदद की गुहार लगाई है। ओम दत्त और मनमोहनी का कहना है कि सरकार इन्हें जल्द से जल्द जमीन और घर उपलब्ध करवाए ताकि विपदा के इस दौर में ये अपनी जिंदगी सही ढंग से जी सकें।

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