
ब्यूरो – रिपोर्ट
आम जनमानस का दर्द जानकर सरकार तक पहुंचाने वाला सेतु खुद ही लड़खड़ा रहा है। साथ ही अपने शोषण की दास्तां बयां कर रहा हो तो लाजमी तौर पर मामला हैरान कर देने वाला है। हिमाचल सरकार का ड्रीम प्रोजैक्ट हैं ‘सीएम हेल्पलाइन 1100।
नमस्कार, सीएम हेल्पलाइन। हम आपकी क्या मदद कर सकते हैं, ये आवाज उस समय सुनाई देती है जब कोई दुखी होकर मुख्यमंत्री से सीधे ही न्याय की उम्मीद करता है। आप ये जानकर हैरान हो जाएंगे कि ये आवाज खुद अपने लिए न्याय मांग रही है।
यही नहीं, कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन (CM Helpline) पर भी अपनी शिकायत दर्ज करवाई है। सूबे में सीएम हेल्पलाइन को शुरू हुए दो साल से अधिक का वक्त गुजर चुका है, लेकिन इन कर्मचारियों को वेतन बढ़ोतरी नहीं मिली।
दरअसल, मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के ड्रीम प्रोजैक्ट की जिम्मेदारी विविन प्राइवेट लिमिटेड को सौंपी गई। जिसका नाम कुछ अरसा पहले बदल दिया गया।
सीएम हेल्पलाइन में पर्दे के पीछे कार्य करने वाले कर्मियों की मानें तो 8 हजार रुपए वेतन मिलता है। 1070 रुपए ईपीएफ सुविधा है। इसके अलावा ईएसआई (ESI) के तहत स्वास्थ्य सुविधा मिलती है।
सीनियर स्टाफ पर कर्मचारियों के साथ बुरा बर्ताव करने का भी आरोप है। कर्मचारियों का कहना है कि प्रबंधक द्वारा ऐसा सलूक किया जाता है कि वो नौकरी नहीं बल्कि भीख मांग रहे हों।
खुलकर सामने आए कर्मचारियों का कहना है कि कर्मचारी गलती करेगा तो उसका बोरिया बिस्तर उठाकर बाहर फैंक दिया जाएगा। कर्मचारियों का कहना है कि सीएम हेल्पलाइन से जुड़े अधिकतर कर्मचारियों को मानसिक तनाव से जूझना पड़ रहा है।
दिन भर में 100 काॅल्स का निपटारा करने की चुनौती होती है। इसके लिए प्रति काॅल पांच मिनट का वक्त दिया जाता है, जबकि पांच मिनट तो काॅलर को पूरी बात समझाने में ही लग जाते हैं।
कर्मचारियों का ये भी कहना है कि माइक सिस्टम की गुणवत्ता इतनी घटिया है कि कई मर्तबा काॅलर की आवाज ही सुनाई नहीं देती है।
कर्मचारियों का कहना है कि अगर इस तरह खौफ का माहौल रहेगा तो हिमाचलवासियों की ढेरों समस्याओं को दर्ज करने में दिक्कतें आएंगी।
कर्मचारियों का कहना है कि वो पूरे हिमाचल की समस्याएं सुनते हैं, मगर उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री सेवा संकल्प योजना लगभग दो साल पहले शुरू की गई थी।
