देश का 25 करोड मुसलमान करता है यूनिफॉर्म सिविल कोर्ट का दिल से समर्थन।
कोटला – स्वयंम
समान नागरिक संहिता सौदर्यपूर्ण और सभी की सहमति से देश में लागू करवाने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ अधिकारी माननीय इंद्रेश कुमार मार्गदर्शक, संरक्षक, पालक मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के मार्गदर्शन में मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने देश में सर्व सहमति बनाने के लिए मुस्लिमों में जागरूकता मुहिम शुरू करते हुए जन – जन तक एक देश, एक कानून ,एक संविधान और एक झंडा की मुहिम छेड़ी है।
जिसमें भारत सरकार द्वारा गठित विधि आयोग द्वारा मांगे गए सुझावों में मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के सदस्य पूरे देश में बड़ी गर्मजोशी से समान नागरिक संहिता को देश में लागू करने का समर्थन कर रहे हैं।
इस कड़ी में देश के विभिन्न प्रांतों के मुस्लिम द्वारा ईमेल से व्यक्तिगत तथा हस्ताक्षर अभियान चलाकर लगभग एक लाख समान नागरिक संहिता के पक्ष में समर्थन पत्र विधि आयोग को भेजे गए हैं। तथा लाखों की संख्या में और भेजे जाएंगे।
इस आशय की जानकारी देते हुए मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के क्षेत्रीय संयोजक केडी हिमाचली ने कहा कि समान नागरिक संहिता किसी भी दृष्टि से इस्लाम विरोधी नहीं है। और न ही मुसलमानों के निजी जीवन में किसी प्रकार का हस्तक्षेप है।
उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता तो दुनिया के दर्जनों देशों में लागू है। और एक संविधानिक प्रक्रिया के तहत देश के सभी नागरिकों को एक समान अधिकार देने का प्रयास है।
ताकि देश में कानूनी, स, सौहदर्य, समरसत्ता, भाईचारा, एकता, अखंडता बनाकर देश को शक्तिशाली और खुशहाल राष्ट्र बनाया जा सके।
उन्होंने कहा कि कुछ कट्टरपंथी शक्तियां समान नागरिक संहिता का विरोध कर मात्र मुसलमानों का झूठा हमदर्द बनकर वोट हासिल करने के लिए कर रही हैं।
हकीकत यह है कि 75 वर्षों के बाद भी देश का पसमंदा मुसलमान सर्वाधिक पिछड़ेपन का दंश झेल रहा है। उन्होंने कहा कि 60 वर्षों तक राज करने वालो ने मुस्लिमो के वोट बैंक की खातिर डराया धमकाया और गरीबी की गर्त में धकेल दिया।
केडी हिमाचली ने सवाल किया कि भारत देश में अनेकों अनेक पंथ धर्म संप्रदाय है समान नागरिक संहिता से किसी भी अन्य धर्म को न कोई खतरा है और न कोई आपत्ति है। मुसलमान को कैसे खतरा पैदा हो सकता है ।
देश का 25 करोड मुसलमान यूनिफॉर्म सिविल कोर्ट का दिल से समर्थन करता है और विरोध करने वाले मुसलमानों से आग्रह करता है कि वह व्यापक देश हित में समान नागरिक संहिता का समर्थन करें।
उन्होंने मुसलमानों को विश्वास दिलाया कि इस्लाम धर्म के अनुसार मुसलमानों के किसी भी कार्यकलाप में यूनिफॉर्म सिविल कोर्ट की कोई दखलंदाजी नहीं है । यह तो सिर्फ वंचितों को हक देने का एक प्रयास है ।

