
धर्मशाला-राजीव जस्वाल
रिसाव से सूखी डल झील में मर रही मछलियों को बचाने के लिए प्रशासन आज मत्स्य विभाग के सहयोग से इन्हें चैतडू में शिफ्ट करेगा, ताकि मछलियों को बचाया जा सके। इस संबंध में प्रशासन ने सोमवार को एसडीएम की अध्यक्षता में डल झील का निरीक्षण करने पहुंची टीम ने निर्णय लिया है।
अभी तक मछलियों को चैतडू शिफ्ट करने का निर्णय लिया गया है, लेकिन शिफ्टिंग कार्य शुरू होने के बाद अन्य स्थान भी चिह्नित किए जा सकते हैं। हालांकि प्रशासन के निर्देश पर जल शक्ति विभाग ने भी नड्डी से पानी छोड़ा है, लेकिन लीकेज अत्याधिक होने के कारण पानी एकत्र नहीं हो रहा है। जिस कारण अब मछलियों को शिफ्ट करने का फैसला प्रशासन की ओर से लिया गया है।
डल झील में ऐसा आलम पहले वर्ष 2014 में हो चुका है। उस समय भी झील की मछलियों को नजदीकी खड्डों में शिफ्ट करना पड़ा था। इसके बाद लीकेज रोकने के लिए कई प्रयास भी हुए, लेकिन कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकल पाए हैं। यही वजह है कि डल झील में रिसाव शुरू हो जाता है। इस बार लीकेज ज्यादा है। जिस कारण पानी न के बराबर रह गया है और मछलियां भी मरनी शुरू हो गई हैं।
धार्मिक महत्व के साथ पर्यटकों का पसंदीदा स्थल
मैक्लोडगंज स्थित डल झील धार्मिक आस्था का केंद्र होने के साथ-साथ पर्यटकों के लिए भी पसंदीदा पर्यटन स्थल है। यहां चंबा के मणिमहेश की तर्ज पर जन्माष्टमी और राधाष्टमी के दिन पवित्र स्नान होता है और मणिमहेश न जा पाने वाले श्रद्धालु यहीं स्नान का पवित्र फल अर्जित करते हैं। लेकिन जिस तरह से लीकेज हो रही है, उससे श्रद्धालुओं की आस्था को भी ठेस पहुंच रही है।
क्या कहते हैं प्रशासनिक अधिकारी
एसडीएम धर्मशाला शिल्पी बेक्टा का कहना है झील में पानी का रिसाव होने से मछलियां मरी हैं। शेष बची मछलियों को बचाना प्राथमिकता है। इसलिए मत्स्य विभाग के सहयोग से मछलियों को शिफ्ट किया जाएगा। मछलियां शिफ्ट करने का कार्य आज शुरू कर दिया जाएगा। यह अभियान एक से दो दिन तक चल सकता है।
उपायुक्त कांगड़ा डाक्टर निपुण जिंदल ने कहा एसडीएम से मिली रिपोर्ट के मुताबिक डल झील की मछलियों चैतडू शिफ्ट किया जाना है। इसके लिए आज से प्रशासन की ओर से शिफ्टिंग कार्य शुरू कर दिया जाएगा
