टांडा में मुफ्त इलाज बंद, आयुष्मान कार्डधारकों को नहीं मिल रही सुविधाएं

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फ्री में नहीं डल रहे स्टंट और नहीं हो रही ज्वाइंट रिप्लेसमेंट, कैथ लैब भी बंद, दूरदराज से आए मरीजों को मजबूरी में करना पड़ रहा अन्य अस्पतालों का रुख

हिमखबर – डेस्क

डा. राजेंद्र प्रसाद आयुर्वेदिक चिकित्सा महाविद्यालय टांडा में आजकल मुफ्त इलाज बंद हो गया है। यहां न फ्री में स्टंट डल रहे हैं और न ही ज्वाइंट रिप्लेसमेंट हो रही। यही नहीं, कैथ लैब भी बंद पड़ी हुई है। दूरदराज से आए मरीजों को मजबूरी में अन्य अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है।

आयुष्मान कार्डधारकों के लिए मुफ्त सुविधाएं बंद पड़ी हुई हैं। इस वजह से कार्डधारकों की मुसीबतें बढ़ गई हैं। एक गरीब परिवार के लिए आयुष्मान कार्ड का सहारा मरते आदमी को संजीवनी बूटी के समान होता है। जब दूरदराज क्षेत्रों चंबा, कुल्लू , मंडी, हमीरपुर आदि से आए मरीज को यह कहा जाता है कि आपको स्टंट नहीं डल सकता या आपकी सर्जरी नहीं होगी तो उसके पांव तले जमीन खिसक जाती है।

कुछ ऐसे मरीज भी होते हैं जोकि अंतिम सांसें ले रहे होते हैं और उनके पास इतना समय नहीं होता है कि वह इलाज के लिए किसी अन्य अस्पताल जा सकें। ऐसे में न जाने कितने मरीज जिंदगी की जंग भी हार चुके होंगे।

टांडा अस्पताल का करोड़ों का फंड पेंडिंग है जो कि हिमाचल प्रदेश सरकार ने अभी तक रिलीज नहीं किया है। नई सरकार के बनने के बाद आयुष्मान कार्डधारकों की मुसीबतें और ज्यादा बढ़ गई हैं।

लगभग दो महीनों से ज्यादा का समय बीत जाने के बाद अभी तक प्रदेश सरकार की तरफ से आयुष्मान कार्डधारकों के मुफ्त इलाज के लिए फंड रिलीज नहीं हो पाया है।

जिसके चलते सात जिलों चंबा, मंडी, हमीरपुर, ऊना, कुल्लू, बिलासपुर और 15 लाख की आबादी वाले सबसे बड़े जिला कांगड़ा के मरीजों को चड़ीगढ़ या दिल्ली का रुख करना पड़ रहा है।

प्रदेश के दूसरे बड़े स्वास्थ्य संस्थान टांडा अस्पताल में आयुष्मान कार्डधारकों को न तो स्टंट डाले जा रहे हैं और न ही ज्वाइंट रिप्लेसमेंट व अन्य कंप्लीट आर्थो सर्जरी की जा रही है। कुछ दूरदराज से आए मरीजों का आरोप है कि सस्ते सामान को खरीद कर कार्ड की राशि को पूरा कर दिया जाता है। कोई भी क्वालिटी ट्रीटमेंट नहीं की जा रही है।

आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद हमें पैसे देकर स्टंट डलवाने को मजबूर होना पड़ रहा है। ऐसे में आयुष्मान कार्ड का कोई भी महत्त्व नहीं रह गया है। हैरानी की बात है कि दो माह बीत जाने के बाद भी अभी तक प्रशासन न जाने किस नींद में सोया है।

न जाने कितने मरीज इन दो महीनों में मुफ्त इलाज की सुविधा न मिल पाने के कारण जिंदगी की लड़ाई हार चुके होंगे। जिस मरीज के पास चंद लम्हे या चंद सांसें बची हों वह ऐसी हालत में अन्य दूसरी जगह जाने में असमर्थ होता है। उनके लिए उस आयुष्मान कार्ड का तब कोई महत्त्व नहीं रह जाता है।

जब वह मुफ्त इलाज की सुविधा ही मुहैया नहीं करवा पाता हो। इस विचित्र स्थिति के लिए आखिर जिम्मेदार कौन होगा? प्रशासन व सरकार को इससे सरोका अवश्य होना चाहिए।

अस्पताल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट के बोल

टांडा अस्पताल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट मोहन सिंह का कहना है कि जल्द ही आयुष्मान कार्ड का फंड सरकार की ओर से रिलीज होने वाला है। उन्होंने कहा कि जैसे ही फंड हमारे पास आ जाएगा अस्पताल में आयुष्मान कार्ड धारकों को पहले की तरह सुविधाएं मुहैया होंगी। स्टंट व अन्य सुविधाएं भी कार्डधारकों को पूर्ववत ही मिलेंगी। मरीजों को किसी भी किस्म की परेशानी अस्पताल प्रबंधन नहीं होने देगा।

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