आशीष शर्मा अमर रहे के नारों से गूंज उठा मोक्षधाम, सैंकड़ों लोगों ने नम आंखों से दी विदाई
पांवटा साहिब, 29 अगस्त – नरेश कुमार राधे
जिला सिरमौर के गिरीपार क्षेत्र के आंजभोज के भरली गांव में मातम पसरा हुआ है। गांव के 25 वर्षीय वीर सपूत आशीष कुमार ने देश की सेवा में अपना सर्वोच्च बलिदान दे दिया है। मंगलवार को अरुणाचल प्रदेश में ‘ऑपरेशन अलर्ट’ के दौरान सैन्य वाहन दुर्घटनाग्रस्त होने से शहीद हुआ बेटा आशीष कुमार वीरवार को पंचतत्व में विलीन हो गया। जुड़वा भाई रोहित और राहुल ने छोटे भाई आशीष को मुखाग्नि दी।
वहीं बड़ी बहन पूजा दूर से ही टकटकी लगाए निहारती रही। सेना के जवानों ने बूढी मां के हाथों में जब तिरंगा सौंपा तो पूरे मोक्षधाम में पल भर के लिए सन्नाटा सा पसर गया। मां ने इसके बाद शहीद आशीष शर्मा अमर रहे के नारे लगाए, जिससे पूरा मोक्षधाम गूंज उठा।
दरअसल, गुरुवार सुबह शहीद की पार्थिव देह उनके पैतृक गांव पहुंची। भारी बारिश और तूफान के बावजूद भूतपूर्व सैनिक संगठन पांवटा साहिब और शिलाई इकाई के पदाधिकारी, सदस्य और सैकड़ों लोग अपने वीर सपूत को श्रद्धांजलि देने के लिए डटे रहे।
जैसे ही पार्थिव देह गांव पहुंची, चारों तरफ चीखें और रोने की आवाजें गूंज उठीं। बारिश ऐसी मानों, आसमान भी बेटे के इस बलिदान के गम में आंसू बहा रहा हो। बारिश के बीच ही शहीद की अंतिम यात्रा निकली। इस दौरान सैंकड़ों लोग अंतिम यात्रा में शामिल हुए।
बता दें कि गांव के इस बेटे का जन्म 14 मार्च 1999 को हुआ था। आशीष कुमार, 19 ग्रेनेडियर बटालियन के अधीन अरुणाचल प्रदेश में सेवारत थे। करीब 6 साल पहले उन्होंने भारतीय सेना में भर्ती होकर अपने सपने को साकार किया था।
आशीष के पिता श्याम सिंह का पहले ही निधन हो चुका था और अब उनके परिवार में केवल उनकी मां, जुड़वा भाई राहुल व रोहित और बहन पूजा रह गए हैं। बहन पूजा वन विभाग में वनरक्षक के पद पर तैनात हैं।

