हिमखबर डेस्क
इस बार हुए लोकसभा चुनावों में जनता ने भी अलग-अलग जनादेश देकर सियासी दलों को आत्म मंथन करने पर मजबूर कर दिया है। भाजपा-कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को भी अब बड़े स्तर पर मंथन करने की जरूरत है। लोकसभा चुनावों में जनता ने अपरोक्ष रूप से नेताओं को भी एक प्रकार से चेतावनी दे दी है कि जनता जब चाहे उन्हें कुर्सी से उतार सकती है।
कांगड़ा-चंबा संसदीय क्षेत्र की बात करें, तो भाजपा प्रत्याशी डा. राजीव भारद्वाज को 17 विधानसभा क्षेत्रों से लीड मिली, लेकिन अगर बात हिमाचल प्रदेश में करीब सवा साल पहले हुए विधानसभा चुनावों की करें, तो भाजपा के कई दिग्गज नेताओं को जनता ने नकार दिया था, इनमें पूर्व मंत्री तक शामिल रहे हैं।
ऐसे में अब सवाल यह भी है कि प्रदेश में कांगे्रस की सरकार होने के बावजूद कांग्रेस नेताओं के हर हलकों से भाजपा को बढ़त मिली है, यह सारे भाजपा कार्यकर्ता थे, तो फिर विधानसभा चुनावों में भाजपा दिग्गजों को हार क्यों झेलनी पड़ी। जनता ने इन नेताओं को विधानसभा चुनावों में क्यों नकार दिया, अब इसका मंथन करना लाजिमी हो गया है। नेताओं की घटती लोकप्रियता का दूसरा ट्रेलर भी लोकसभा चुनावों में ही देखने को मिला।
विधानसभा चुनावों में विरोधियों को हराकर विधानसभा पहुंचने वाले कांग्रेस विधायक बेशक अपनी जीत पर इतरा रहे हों, लेकिन लोकसभा चुनावों में कांग्रेस विधायकों की ऐसी किरकिरी हुई, जो लोगों में चर्चा का विषय बनी हुई है।
कांग्रेस के लिए इससे बड़ी हैरान करने वाली बात और क्या हो सकती है कि पूरे संसदीय क्षेत्र में 17 में से 11 विधायक कांग्रेस के थे और प्रदेश में सरकार भी कांग्रेस की थी, लेकिन एक भी विधायक या मंत्री अपने हलके से कांग्रेस प्रत्याशी को लीड नहीं दिला पाया और कांग्रेस प्रत्याशी एक बड़े अंतर से हार गए।
एक चीज साफ है कांगड़ा-चंबा के नेता जीतकर भी जनता की नजर में हारे हुए हैं। या यूं कह लें कि जनता का भरोसा जीतने में वे पूरी तरह से कामयाब नहीं हो पाए हैं। इसलिए हाल में हुए चुनावों में मिले जनादेश के इशारे को समय रहते समझने में ही भलाई है।
सुधीर-लखनपाल की जीत ने दिया संदेश
सियासी जानकारों का मानना है कि अब मतदाता भी जागरुक हो गया है। विकास और जनता के बीच रहने वाले उम्मीदवार को हर जगह तवज्जो दी जाती है। इसलिए अब नेताओं को भी जनसेवक बननेे की जरूरत है, नहीं तो जनादेश का पलड़ा कभी भी कम हो सकता है।
हिमाचल प्रदेश के छह विधानसभा उपचुनावों में कांग्रेस ने शानदार प्रदर्शन करते हुए चार सीटों पर कब्जा लिया, लेकिन धर्मशाला में सुधीर शर्मा और बड़सर में इंद्रदत्त लखनपाल की जीत ने फिर वही संकेत दे दिया कि अब जनता के दुखदर्द में शामिल होना पड़ेगा।

