सिरमौर – नरेश कुमार राधे
सामान्य तौर पर कई मर्तबा मेडिकल प्रोफेशन की कार्यशैली पर संदेह जताया जाता है, लेकिन कुछ ऐसे भी चेहरे हैं जो मानवता की मिसाल पेश कर मेडिकल प्रोफेशन की लाज बचा लेते हैं। इसी तरह का एक वाक्य डॉक्टर वाईएस परमार मेडिकल कॉलेज में वीरवार शाम को पेश आया।
विकासखंड के पातलियों गांव की रहने वाली एक 22 वर्षीय युवती की हालत काफी नाजुक हो गई। युवती को क्षय रोग की वजह से सांस लेने में दिक्कत आ रही थी। पीजीआई चंडीगढ़ ले जाने के लिए अस्पताल में एक भी एंबुलेंस उपलब्ध नहीं थी।
108 मरीजों को लेकर गई हुई थी। जैसे- तैसे गरीब लड़की की मदद के लिए अस्पताल स्टाफ ने प्रशासन से गुहार लगाई। प्रशासन ने रेडक्रॉस सोसाइटी की एंबुलेंस को पीजीआई चंडीगढ़ निशुल्क उपलब्ध करवाने के लिए हामी भर दी, साथ ही एम्बुलेंस पायलट व समाजसेवी राम सिंह ने भी झट से स्टेयरिंग संभाल लिया।
इसी बीच बड़ा सवाल यह पैदा हो गया कि क्रिटिकल कंडीशन में रोगी के साथ अस्पताल स्टाफ से कौन जाएगा। यह सवाल पैदा होने के बाद हर कोई एक दूसरे का चेहरा देखने लगा। इसी बीच पलमोनरी मेडिसिन के विशेषज्ञ डॉक्टर राघव को भी यह जानकारी मिली। ड्यूटी की थकान होने के बावजूद भी एक पल में डॉक्टर राघव बगैर सोचे समझे रोगी वाहन में बैठ गए।
आपको बता दें कि निजी चिकित्सा के क्षेत्र में रोगियों को मेडिकल स्टाफ उपलब्ध हो जाता है, लेकिन सरकारी में ऐसे वाक्य दुर्लभ ही देखने को मिलता हैं। शाम 5:00 बजे से पहले ही रेडक्रॉस एंबुलेंस में ऑक्सीजन सिलेंडर के अलावा एक एक्सपर्ट चिकित्सा के मौजूदगी में जीवन व मौत के बीच संघर्ष लड़ रही यूवती को पीजीआई चंडीगढ़ रवाना कर दिया गया।


