सभी विभागों को सौंपी जिम्मेदारी, 23 नवंबर से शुरू होंगे मेले
काँगड़ा – राजीव जस्वाल
जयंती माता मेलों के दौरान व्यवस्था बनाए रखने के लिए शासन व पुलिस प्रशासन मुस्तैद हो गया है। पंच भीष्म मेलों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनी रहे। इसके लिए अतिरिक्त फोर्स लगाई जाएगी। यह भी सुनिश्चित किया जाएगा की पार्किंग की व्यवस्था मुकम्मल बनी रहे व जाम की स्थिति पैदा ना हो।
डीएसपी कांगड़ा अंकित शर्मा ने बताया कि व्यवस्था बनाए रखने के लिए दिशा-निर्देश दिए गए हैं। इस बीच सोमवार को मंदिर अधिकारी माता बज्रेश्वरी देवी मंदिर नीलम राणा की अध्यक्षता में यहां एक बैठक भी आयोजित की गई, जिसमें सभी विभागों को जिम्मेदारियां सौंपी गई।
जयंती माता मंदिर के पुजारी करनेश शर्मा व चंद्रभूषण मिश्रा की मौजूदगी में हुई इस बैठक में कहा गया कि पेयजल विद्युत व अन्य सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए विभागों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। कांगड़ा घाटी में पंच भीष्म का मेला भी कांगड़ा के जयंती माता के मंदिर में पांच दिनों तक लगता है । जो 23 नवंबर से शुरू होगा।
जयंती माता मंदिर का इतिहास
गौरतलब है कि जयंती माता मंदिर से कांगड़ा का इतिहास भी जुड़ा है। अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने भी कुछ समय इस मंदिर में व्यतीत किया था। समाजसेवी अजय वर्मा का परिवार यहां मेलों के दौरान लंगर की व्यवस्था करता है। मंदिर के विकास में वर्मा परिवार का काफी योगदान है।
मंदिर के गर्भ गृह में मेलों के दौरान दिए जगाने की परंपरा भी गुरुवार से निभाई जा रही है। ऐतिहासिक दुर्ग से जयंती माता मंदिर तक रोप-वे बनाने की घोषणाएं भी हमारे शासक करते रहे हैं, लेकिन उसको अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका है।
जयंती माता मंदिर में हर वर्ष पंचभीष्म मेले लगते हैं। ये मेले हर साल कार्तिक मास की एकादशी से शुरू होते हैं। कांगड़ा किला के बिलकुल सामने 500 फुट की ऊंची पहाड़ी पर स्थित जयंती मां दुर्गा की छठी भुजा का एक रूप है। द्वापर युग में यह मंदिर यहां पर निर्मित हुआ था। जयंती माता का मंदिर भक्तों के लिए महत्त्वपूर्ण आस्था स्थल है।
द्वापर युग में बनाया गया था मंदिर
जयंती मां जहां जीत की प्रतीक हैं, तो वहीं पाप नाशिनी भी हैं। शक्तिपीठ माता बज्रेश्वरी देवी मंदिर से करीब छह किलोमीटर दूर पहाड़ी पर स्थित कांगड़ा के आसपास के क्षेत्रों के साथ अन्य प्रदेशों के लोगों में भी जयंती माता के प्रति काफी आस्था है।
बताया जाता है कि मंदिर के इतिहास से कांगड़ा का भी इतिहास जुड़ा है। पंचभीष्म मेलों के दौरान इस क्षेत्र का नजारा ही कुछ और होता है। द्वापर युग में यह मंदिर यहां बनाया गया था। महाभारत के युद्ध के समय युधिष्ठिर को मां जयंती ने स्वप्न दिया था कि उनकी इस युद्ध में जीत होगी।

