जम्मू-कश्मीर को मिलेगा राज्य का दर्जा? सुप्रीम कोर्ट में कल होगी सुनवाई

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New Delhi – Naveen Chauhan 

सुप्रीम कोर्ट जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने की याचिका पर गुरुवार सुनवाई करेगा। मुख्य न्यायाधीश बी आर गवई की अध्यक्षता वाली एक पीठ इस मामले में हस्तक्षेपकर्ताओं में से एक द्वारा ‘संविधान के अनुच्छेद 370 के संबंध में’ दायर याचिका पर सुनवाई करेगी।

शीर्ष अदालत में 14 अगस्त को सुनवाई के लिए जारी वाद सूची में इसका जिक्र किया गया है। अदालत उस याचिका पर सुनवाई करेगी जिसमें केंद्र सरकार द्वारा अदालत को दिए गए आश्वासन के अनुसार, उसे (केंद्र को) दो महीने के भीतर समयबद्ध तरीके से जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने का निर्देश देने की मांग की गई है।

इसजज़हूर अहमद भट और अन्य ने अक्टूबर, 2024 में अदालत में आवेदन दायर किया था। एक अन्य याचिका इरफान हाफिज लोन ने दायर की थी।

याचिका में दावा किया गया था कि समयबद्ध तरीके से जम्मू-कश्मीर के राज्य के दर्जे की बहाली न करना संघवाद के विचार का उल्लंघन है, जो संविधान के मूल ढांचे का एक हिस्सा है।

याचिका में कहा गया है, “यह अत्यंत महत्वपूर्ण है कि राज्य का दर्जा बहाल किया जाए ताकि लोग अपनी व्यक्तिगत पहचान में स्वायत्तता का आनंद ले सकें और देश के समग्र विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकें।”

याचिका में कहा गया है कि अगर जल्द से जल्द ऐसा निर्देश पारित नहीं किया गया तो इससे देश के संघीय ढांचे को गंभीर नुकसान होगा।

याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि भारतीय राजनीतिक इतिहास में संविधान संशोधन के बिना किसी राज्य को केंद्र शासित प्रदेश में बदलने और विधायिका सहित केंद्र शासित प्रदेश बनाने का कोई उदाहरण नहीं है।

इसमें यह भी कहा गया है कि किसी राज्य को केंद्र शासित प्रदेश में बदलने से संबंधित राज्य के लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन होता है।

याचिका में कहा गया है, “जम्मू-कश्मीर एक अलग राज्य है जिसने कई संघर्षों और कठिनाइयों का सामना किया है और इस क्षेत्र के विकास और इसकी अनूठी संस्कृति का जश्न मनाने में मदद के लिए एक मज़बूत संघीय ढाँचे की आवश्यकता है।”

ग्यारह दिसंबर- 2023 के फैसले के कई महीने बीत जाने के बाद भी आज तक जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया है, जो जम्मू-कश्मीर के निवासियों के अधिकारों को गंभीर रूप से प्रभावित कर रहा है और संघवाद के मूल ढाँचे का भी उल्लंघन कर रहा है।

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