मंडी, 04 सितंबर – अजय सूर्या
हिमाचल प्रदेश अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के पूर्व महामंत्री राजेश शर्मा ने सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू से पूछा कि जब वित्त वर्ष 2024-25 के वार्षिक बजट में कर्मचारियों के वेतन और पेंशन का प्रावधान किया है तो फिर इस पैसे को समय पर क्यों नहीं दिया जा रहा है। राजेश शर्मा ने सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या वार्षिक बजट में प्रावधान के बाद भी इस पैसे को किसी दूसरी जगह डायवर्ट किया जा रहा है।
प्रदेश के इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ कि कर्मचारियों को वेतन के लिए इंतजार करना पड़ा हो। विश्व जब कोरोना जैसी महामारी के दौर से गुजर रहा था तो उस वक्त भी प्रदेश के कर्मचारियों को समय पर वेतन दिया गया। लेकिन प्रदेश के इतिहास में मौजूदा सरकार ने एक नया अध्याय लिखा है।
उन्होंने कहा कि अभी मौजूदा वित्त वर्ष के मात्र 5 महीने ही बीते हैं। कर्मचारियों व पेंशनरों के वेतन-भत्तों पर संकट मंडराने लग गया है, आने वाले 7 महीनों में क्या स्थिति होगी, इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। राजेश शर्मा ने कहा कि यदि प्रदेश पर इस प्रकार का वित्तीय संकट आने वाला था तो उसकी सरकार को पहले से जानकारी रहती है।
ऐसी स्थिति में सरकार को 1 या 2 महीने पहले ही इस प्रकार की चेतावनी जारी कर देनी चाहिए थी। ताकि कर्मचारी उस तरह से भविष्य के लिए तैयार रहते। जिस प्रकार प्रदेश सरकार का बजट होता है उसी तरह हर एक कर्मचारी का मासिक बजट होता है। उस मासिक बजट में उसने अपने परिवार का पालन पोषण करना होता है। लेकिन इस बार सरकार ने कर्मचारियों के उस मासिक बजट का झटका देकर पूरे परिवार को परेशानी में डालने का काम किया है।

