
व्यूरो रिपोर्ट
पूर्व पंचायत समिति सदस्य एवं वर्तमान उपप्रधान पंचायत डोल भटहेड़ साधू राम राणा ने प्रेस वार्ता में कहा कि हमारे देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था के माध्यम से गरीबी रेखा में जिंदगी बसर करने वाले परिवारों को ऊपर उठाने का जिम्मा जिन नेताओं को सौंपा जाता है, वह अपने अथाह वेतन भत्तों एवं पैंशन योजना जैसी सुविधाएं लेकर अपनी जिंदगी जीना अपना मौलिक अधिकार समझते हैं.
दुसरी तरफ जिन जातियों को आरक्षण की व्यवस्था से गरीबी रेखा से ऊपर उठाने की योजना लागू की गई है. वह योजना भी आरक्षण वर्ग के सीमित आरक्षित साधन संपन्न लोगों तक ही सीमित होकर रह गई है। क्योंकि कि आरक्षित वर्ग की जातियों में साधन संपन्न लोग जब तक आय के आधार पर आरक्षण से बाहर नहीं किए जाएंगे तब तक आरक्षित वर्ग जातियों के गरीब एवं जरुरतमंद परिवारों को आरक्षण का लाभ उठाकर साधन संपन्न होने का मौका नहीं मिल सकता है ।
अतः आरक्षित जातियों में गरीब परिवार एवं जरुरतमंद परिवारों के हकों को कुचलने वाले और कोई नहीं बल्कि उनकी जातियों के अमीर एवं साधन संपन्न परिवार हैं. जो अपनी जातियों के गरीब एवं जरुरतमंदों के लिए अपने परिवारों को आरक्षण से बाहर करने के लिए किसी भी कीमत पर सहमति प्रकट नहीं कर पा रहे हैं.
ना ही हमारे लोकतांत्रिक तरीके से चुने हुए नुमाइंदे इस पर कोई चर्चा एवं निति बनाने केलिए एक मत होते दिखाई दे रहे हैं. जिससे लगता नहीं कि कभी गरीब एवं जरुरतमंद परिवारों को गरीबी रेखा से ऊपर उठाने का मौका मिल सके।
अतः यदि नेता अपने अथाह वेतन-भत्तों एवं पैंशन योजना पर अंकुश लगाएं और आरक्षित जातियों में साधन संपन्न परिवार आरक्षण का लाभ लेना छोड़ दें, तो बहुत जल्द देश में गरीब परिवार एवं जरुरतमंद परिवारों का गरीबी रेखा से ऊपर उठाने का क्रम शुरू होता दिखाई दे सकता है. अन्यथा गरीब और गरीब और अमीर और अमीर होना का वर्तमान क्रम ही जारी रहेगा।
