जब श्मशान घाट पर मृत महिला की चलने लगीं सांसें तो लोगों के पैर कांप गए। परिवार वालों ने भी तेजी दिखाते हुए एम्बुलेंस मंगाई और उसे जिला अस्पताल ले पहुंचे। यहां चिकित्सकों ने महिला का फिर से ईसीजी कर जांच की।
हिमखबर डेस्क
मथुरा के वृंदावन की गौरा नगर कॉलोनी में बीती रात हैरान करने वाला वाक्या सामने आया है। यमुना किनारे श्मशान स्थल पर अंतिम संस्कार से पहले मृत महिला की सांसें चलने लगीं और शरीर में भी हलचल होने लगी। इसे देख महिला के पति और अंतिम यात्रा में पहुंचे लोग भी चौंक गए।
आनन-फानन में 108 एम्बुलेंस से महिला को दोबारा जिला संयुक्त चिकित्सालय ले जाया गया। चिकित्सकों ने महिला की ईसीजी की, इसके बाद फिर उसे मृत घोषित कर दिया। देर रात महिला का अंतिम संस्कार हो सका। यह घटना वृंदावन में चर्चा का विषय बनी हुई है।
गौरा नगर कॉलोनी निवासी बेनामी की पत्नी 38 वर्षीय कविता की एक सप्ताह पहले अचानक तबियत खराब हो गई। उसका एक हाथ और एक पैर चल रहा था और मुंह से बोला भी नहीं जा रहा था। बेनामी और परिजन उसे रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम अस्पताल ले गए।
जब पांच दिन के उपचार के बाद सुधार नहीं हुआ तो शनिवार को कोमा की स्थिति बन जाने पर परिजन तत्काल जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल ले गए। जहां रविवार की सुबह करीब दस बजे चिकित्सकों ने महिला को मृत घोषित कर दिया और डेथ सर्टिफिकेट जारी कर दिया।
परिजन कविता के शव को लेकर वृंदावन आ गए। शाम सात बजे शव यात्रा यमुना किनारे मोक्ष धाम पहुंची। परिजनों द्वारा अंतिम संस्कार की तैयारियां की जा रही थी कि तभी अचानक शव में हलचल दिखाई दी और सांस चलने का अहसास होने लगा। जिसे देख मौजूद लोग असमंजस में पड़ गए।
बेनामी ने बताया कि अंतिम संस्कार से पहले पत्नी के शरीर में सामान्य स्थिति की तरह गर्माहट थीं। अकड़न भी नहीं हुई थी। सांस चलने का अहसास हो रहा था। पत्नी के जीवित होने का अहसास हो रहा था। उन्होंने 108 एम्बुलेंस बुलाई और श्मशान घाट से फिर जिला संयुक्त चिकित्सालय लेकर महिला को लेकर पहुंचे।
चिकित्सकों ने ईसीजी की और जांच की। इसके बाद उसे मृत घोषित कर दिया। इसके बाद परिजनों ने देर रात मृतका का अंतिम संस्कार कर दिया।