हिमखबर डेस्क
काम का बोझ और एमडी बनने की तैयारी को लेकर मेडिकल कॉलेज चंबा से 20 जूनियर रेजिडेंट चिकित्सकों ने नौकरी को अलविदा कह दिया है। वर्तमान में मेडिकल कॉलेज चंबा में महज 9 रेजिडेंट चिकित्सक ही तैनात हैं।
ऐसे में पहले ही चिकित्सकों की कमी से जूझ रहे मेडिकल कॉलेज चंबा में अब फिर से मरीजों और चिकित्सकों की मुसीबतें बढ़ गई हैं। इतना ही नहीं, अब काम को व्यवस्थित करने में तैनात चिकित्सकों की परेशानियां बढ़ गई हैं।
बता दें कि मेडिकल कॉलेज चंबा में जिले की पौने छह लाख की आबादी स्वास्थ्य लाभ के लिए निर्भर है। मेडिकल कॉलेज में उपचार करवाने के लिए रोजाना 800 से 1200 तक की ओपीडी रहती है। पहले से मेडिकल कॉलेज में चिकित्सीय स्टाफ के 60 फीसदी पद रिक्त पड़े हैं।
ऐसे में प्रबंधन की ओर से रेजिडेंट चिकित्सकों के सहारे ही विभिन्न विभागों में काम-काज को निपटाने समेत रात्रि ड्यूटी लगाकर मरीजों को बेहतर से बेहतरीन स्वास्थ्य लाभ देने के प्रयास किए जाते रहे हैं, लेकिन मेडिकल कॉलेज चंबा में अब 20 जूनियर रेजिडेंस चिकित्सकों ने अपनी ड्यूटी से त्यागपत्र दे दिया है।
इसके पीछे उन्होंने एमडी बनने की तैयारी के लिए व्यवस्था अधिक होने का कारण जाहिर किया है। मेडिकल कॉलेज चंबा में 39 जूनियर रेजिडेंट चिकित्सकों के पद स्वीकृत हैं। इनमें करीब-करीब सभी पद भरे थे, लेकिन अब एक साथ 20 जूनियर रेजिडेंट चिकित्सकों ने अपने पद से त्यागपत्र दे दिया है। इसके बाद मेडिकल कॉलेज में महज 9 जूनियर रेजिडेंट चिकित्सक रहे हैं।
मेडिकल कॉलेज चंबा के मीडिया समन्वयक डॉ. पंकज गुप्ता ने बताया कि 20 जूनियर रेजिडेंट चिकित्सकों ने अपने पद से त्याग पत्र दे दिया है। अब महज 9 जूनियर रेजिडेंट चिकित्सक ही मेडिकल कॉलेज चंबा में रहे हैं।

