
बैजनाथ- बर्फू
कभी सोचा नहीं था कि जीवन ऐसे दिन भी दिखाएगा, जब दो पैसे के लिए लाचार हो जाएंगे। लोअर भट्टू की रामकली पर मुसीबत आई तो ऐसी की खत्म ही नहीं हो रही है। बैजनाथ के लोअर भट्टू में रहने वाली रामकली के पति की चार माह पहले मौत हो गई। अभी दस दिन पहले ही रामकली को अधरंग का अटैक आ गया। उसका उपचार करवाने के लिए अस्पताल तक जैसे तैसे पहुंचाया गया तो उसको दूसरी बार फिर से अधरंग का अटैक आ गया।
चिकित्सकों ने महिला को जमीन पर लेटाने के बजाय बेड पर लेटाने का सुझाव दिया है। इससे फिर से अटैक आने का खतरा कम हो जाएगा। राम कली की व्यथा यह है कि उसके दो बच्चे हैं, एक दस साल का और दूसरा दो साल का। घर भी गिरने के कगार पर है। उसे लेटाने के लिए घर में बेड तक नहीं है। ऐसे में बच्चों के खान खर्च व बीमारी ने उसे पूरी तरह से तोड़ दिया है।
जब इस बात की सूचना समाजसेवी संजय शर्मा बड़का भाऊ को मिली तो वह टांडा पहुंच गए। दरअसल टांडा अस्पताल से रामकली को छुट्टी हो गई पर उसके पास इतने पैसे नहीं थे कि वह एंबुलेंस या अन्य वाहन करके घर तक पहुंच सकती। बड़का भाउ ने महिला को घर तक पहुंचाया।
बड़का भाऊ ने बताया इस बार महिला को जो दूसरा अटैक आया है वह ज्यादा मेजर था। महिला का घर गिरने के कगार पर है और बच्चे छोटे हैं, घर में बेड तक नहीं है। कुछ समान संजय शर्मा ने उपलब्ध करवाया है। महिला ने एक पोस्टर बैजनाथ बाजार में लगवाया है, जिसमें बड़े अक्सर में लिखा है कि मेरी मदद मत करिये सरकर जी। ऐसे में अति संवेदनशील इस विषय को संजय शर्मा ने उठाया है। हालांकि इन दिनों यह पोस्टर चर्चा का विषय बना हुआ है।
यह बोले संजय शर्मा बड़का भाऊ
संजय शर्मा ने कहा कि एक व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए कि जरूरतमंद व गरीब तक सरकार की सुविधाएं पहुंचनी चाहिएं। लेकिन यह सुविधाएं जरूरतमंद को न मिलें तो सारे अभियानों पर सवाल उठता है। घर गिरने के कगार पर है, दो बच्चे हैं और महिला अधरंग से पीड़ित है, घर में एक बेड तक नहीं है, इससे ज्यादा संवेदनशील व जरूरतमंद और कौन होगा।
उन्होंने कहा कुछ पोस्टर बैजनाथ में महिला की तरफ से स्थानीय विधायक व प्रशासन को जगाने के लिए लगाए गए हैं कि मेरी मदद मत करिये सरकार जी। इसमें भी दीनहीनता व संवेदनशीलता दिख रही है जो सरकार व प्रशासन को नहीं दिख रही।
