हिमखबर डेस्क
जिले में सर्दियों में कम बारिश और लंबे ड्राई स्पेल के कारण वनाग्नि की आशंका बढ़ गई है। इस पर ध्यान देते हुए वन विभाग ने फायर सीजन की तैयारियां पहले से शुरू कर दी हैं।
विभाग ने 15 मार्च से 15 जून तक स्टाफ की छुट्टियां रद्द कर दी हैं। धर्मशाला वन वृत के अंतर्गत 209 वन बीटें हैं, जिनकी देखरेख नियुक्त 209 वन मित्रों के कंधों पर होगी।
फायर वॉचर्स की नियुक्तियां की जाएंगी, और सेटेलाइट के माध्यम से जंगलों पर निगरानी रखी जाएगी। किसी भी आग की सूचना तुरंत मोबाइल अलर्ट के माध्यम से जिला और मंडल स्तर तक पहुंचाई जाएगी।
धर्मशाला वन मंडल में लगभग 70 से अधिक बीटें, जिनमें से लगभग 50 बीटें अति संवेदनशील मानी जाती हैं। मंडल में करीब 61,000 हेक्टेयर वन क्षेत्र आता है, जिसमें 40,000 हेक्टेयर में चीड़ के जंगल हैं। सूखी पत्तियों के कारण आग तेजी से फैल सकती है।
तीन वर्षों में 4257 वनाग्नि के मामले सामने आए हैं, जिनसे लगभग 2843 हेक्टेयर प्राकृतिक भूमि और 1364 हेक्टेयर पौधों को नुकसान हुआ।
वासु कौशल, मुख्य अरण्यपाल, वन विभाग के बोल
जनता से अपील है कि जंगलों में आग न लगाएं और किसी भी आग की घटना तुरंत विभाग को सूचित करें। रेंज और डिवीजन स्तर पर कंट्रोल रूम स्थापित कर और टीमें गठित कर सतर्कता बढ़ा दी गई है।

