कांगड़ा में सात फेरों पर भारी पड़ रहा घरेलू हिंसा का वार

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धर्मशाला- राजीव जस्वाल

प्रदेश का दूसरा सबसे बड़ा जिला कांगड़ा शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर सुधार कर रहा है, लेकिन जिले में अभी भी घरेलू महिलाओं पर अत्याचारों में कमी नहीं आई है। जहां एक तरफ नारी को देवी का दर्जा दिया जाता है। वहीं, जिले में आज भी कुछ विकृत मानसिकता के लोग महिलाओं पर अत्याचार करने से बाज नहीं आ रहे हैं।

इसी का कारण है कि घरेलू हिंसा के मामले दिन-प्रतिदिन बढ़ते जा रहे हैं। आंकड़ों पर नजर डालें तो बीते साल दिसंबर माह तक ही जिले भर में घरेलू हिंसा के 787 मामले आ चुके हैं। वहीं, 2020-21 की बात करें तो जिले में 949 महिलाओं को घरेलू हिंसा का शिकार होना पड़ा था।

आंकड़ों के देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा है कि जिले में आने वाले समय में इनमें वृद्धि ही होगी। आलम यह है कि सात फेरे लेकर जीवन भर साथ निभाने का वचन लेने वाले पति और पत्नी अब प्रशासन एवं न्यायालय का दरवाजा खटखटाने लगे हैं।

हालांकि घरेलू हिंसा के बढ़ रहे मामलों में कोरोना महामारी को भी एक बड़ा कारण माना जा रहा है। प्रदेश में दो साल में लॉकडाउन के कारण पति और पत्नी के साथ रहने की वजह से घरेलू हिंसा में एक तरफ जहां भारी इजाफा हुआ, वहीं कई रिश्ते टूटने के कगार पर पहुंच चुके हैं।

शिविरों में किया घरेलू हिंसा को रोकने के प्रति जागरूक : रंजीत

महिला एवं बाल विकास विभाग जिला परियोजना अधिकारी रंजीत सिंह ने बताया कि विभाग की ओर से समय-समय पर घरेलू हिंसा को रोकने के लिए शिविरों का आयोजन किया जाता है। उन्होंने बताया कि विभाग की ओर से निर्मित वन स्टाप केेंद्रों में विभाग के टीम की घरेलू हिंसा से संबंधित दंपतियों को जागरूक कर मामलों को सुलझा रही है।

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