
शिमला – नितिश पठानियां
सुक्खू मंत्रिमंडल में धर्मशाला से विधायक व पूर्व मंत्री सुधीर शर्मा को स्थान नहीं मिल पाया है। सुधीर शर्मा को मंत्री न बनाने को लेकर राजनीतिक गलियारों में खासी चर्चा है। बता दे, सुधीर शर्मा पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय वीरभद्र सिंह परिवार के सबसे करीबी नेताओं में से एक माने जाते हैं।
मंत्रिमंडल में वरिष्ठ नेताओं की अनदेखी होना कोई नई बात नहीं है। ऐसा पहले भी कई बार हो चुका है, लेकिन सुधीर शर्मा को मंत्री न बनाने के पीछे की कहानी पार्टी की अंतर्कलह को सामने ला रही है।
सुधीर की शिकायत की थी पार्टी हाईकमान
संगठन सूत्रों के अनुसार कांगड़ा जिला के ही विधायक की वजह से सुधीर शर्मा मंत्रिमंडल में शामिल नहीं हो पाए। कांगड़ा के एक विधायक ने सुधीर की शिकायत पार्टी हाईकमान से की थी।
इसमें उनका उप चुनाव लड़ने से इन्कार करने और चुनाव से पहले दिल्ली में भाजपा नेताओं से मुलाकात की बात कही है। हालांकि, इसमें कितनी सच्चाई है यह हाईकमान को ही पता है, लेकिन मंत्रिमंडल से उनका नाम कटने से इसे जोड़ा जा रहा है।
बीते शनिवार को मुख्यमंत्री सुक्खू ने सुधीर शर्मा को फोन कर शिमला बुलाया था। हालांकि, फोन पर हुई बातचीत में सुधीर को मंत्रिमंडल में शामिल किया जाएगा, इसका जिक्र नहीं किया गया। सुधीर, फोन आने के बाद साथियों के साथ देर रात शिमला पहुंचे, लेकिन मंत्री पद की शपथ के लिए उन्हें फोन नहीं आया।
धर्माणी को मंत्री न बनाना भी चौंका गया
घुमारवीं से विधायक राजेश धर्माणी को भी मंत्रिमंडल में शामिल करने की चर्चा काफी समय से चली थी। धर्माणी कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव हैं और कांग्रेस चार्जशीट कमेटी के अध्यक्ष भी थे। सुक्खू के वह करीबी माने जाते हैं। पूर्व सरकार में सीपीएस थे, ऐसे में उन्हें मंत्री बनाया जाएगा, यह तय माना जा रहा था।
अब तर्क दिया जा रहा है कि संसदीय क्षेत्र से मुख्यमंत्री व उप मुख्यमंत्री हैं, इसलिए वह मंत्री नहीं बन पाए। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान जब तीन पद भरे जाएंगे तो सुधीर शर्मा और धर्माणी का नाम इसमें शामिल किया जाएगा।
