
व्यूरो, रिपोर्ट
मूसलधार बारिश के कारण हुए नुकसान की भरपाई के लिए अब कदम उठाए जा रहे हैं लेकिन जहां बरसात से पहले ही क्षति हुई है उस दिशा में अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।
प्रशासन हो या फिर राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, इस ओर ध्यान नहीं दे पाया है। ऐसा ही अनदेखी का मामला पठानकोट- मंडी राष्ट्रीय राजमार्ग पर मटौर स्थित मनूनी खड्ड पुल पर सामने आया है। पुल की टूटी रेलिंग को अभी तक दुरुस्त नहीं किया गया है।
28 जून की सुबह मंडी की ओर से जम्मू जा रही टमाटरों से लदी जीप के खड्ड में गिरने से पुल की रेलिग क्षतिग्रस्त हो गई थी। हादसे के 23 दिन बीतने के बाद भी राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण रेलिग की मरम्मत करवाने में नाकाम रहा है।
पुल से रोजाना सैकड़ों वाहन गुजरते हैं। सेना के वाहनों की आवाजाही भी होती है। टूटी रेलिग के कारण हमेशा दुर्घटना का अंदेशा रहता है।
हादसे में जीप सवार दो लोग घायल हो गए थे। बड़ी बात यह है कि इस पुल से अक्सर प्रशासनिक अधिकारियों की आवाजाही भी होती रहती है, लेकिन किसी भी अधिकारी का ध्यान इस ओर नहीं गया है।
लोग हैरान हैं कि इतना बड़ा हादसा होने के बावजूद राष्ट्रीय राजमार्ग से गुजरने वाले अधिकारी टूटी रेलिग की अनदेखी कैसे कर सकते हैं। पठानकोट-मंडी राष्ट्रीय राजमार्ग 224 किलोमीटर लंबा है।
सामरिक दृष्टि से लेह तक जाने के लिए यह मार्ग महत्वपूर्ण माना जाता है। फोरलेन बनने की प्रक्रिया के बाद यह मार्ग भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अधीन है।
राष्ट्रीय राजमार्ग के रखरखाव की जिम्मेदारी सड़क प्राधिकरण की है पर अभी तक पुल की सुरक्षा रेलिग को ठीक करने के लिए कोई भी कदम नहीं उठाया गया है।
अभिषेक वर्मा, एसडीएम कांगड़ा के बोल
प्रशासन ने पुल की रेलिंग को दुरुस्त करने का आदेश हाइवे अथारिटी को दे दिया है। तुरंत प्रभाव से इस दिशा में कदम उठाया जाएगा।
कर्नल अनिल सेन, परियोजना निदेशक, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के बोल
मटौर पुल की टूटी रेलिग का मामला ध्यान में है। बारिश की वजह से वेल्डिंग नहीं हो पा रही है। जैसे ही धूप निकलेगी तो रेलिग को शीघ्र दुरुस्त कर दिया जाएगा।
