
दुराना- राजेश कुमार
पूर्व पंचायत समिति सदस्य एवं वर्तमान उपप्रधान पंचायत डोल भटहेड़ साधू राम राणा ने प्रेस वार्ता में कहा कि 1977 से लगातार पहले गुलेर एवं वर्तमान में ज्वाली विधानसभा चुनाव का परिणाम जो भी रहा हो लेकिन विधानसभा एवं लोकसभा के हर चुनाव में कोटला बैल्ट से भाजपा को ही बढ़त हासिल होती रही हैै। जिसका एक मुख्य कारण कोटला बैल्ट के स्थानीय निवासी डाक्टर हरबंस राणा का भाजपा प्रत्याशी होना भी रहा है।
बैल्ट का स्थानीय उमीदवार होना भी मतदाताओं को आकर्षित करने में काफी हदतक मददगार साबित होता है। इस का उदाहरण भी कोटला बैल्ट से ही 1982 के चुनावों में देखने को मिला था। जब हरबंस राणा का टिकट राजनीति उथल-पुथल के कारण कटने से भाजपा प्रत्याशी ज्वाली क्षेत्र के निवासी एडवोकेट रघुवीर गुलेरिया को दिया गया था लेकिन कोटला बैल्ट से आजाद प्रत्याशी हरबंस राणा को ही बढ़त हासिल हुई थी। और इस कारण से दोनों की लड़ाई का फायदा उठाकर चौधरी चंद्र कुमार आसानी से चुनाव जीत गए थे।
चुनाव जीतने के उपरांत चौधरी चंद्र कुमार ने कोटला बैल्ट में विकास की रफ्तार बढ़ाते हुए कुछ हद तक कोटला बैल्ट के मतदाताओं को अपनी ओर आकर्षित करने में कामयाबी हासिल की, लेकिन कई चुनाव जीतने उपरांत भी कोटला बैल्ट की भाजपा बढ़त को किसी भी चुनाव में तोड़ नहीं पाए थे।
इस क्रम के चलते पिछली मर्तबा भाजपा प्रत्याशी अर्जुन ठाकुर जोकि ज्वाली बैल्ट से होते हुए भी कोटला बैल्ट से पिछले रिकार्ड को ध्वस्त करते हुए लगभग छः हजार वोटों की बढ़त हासिल करते हुए चुनाव जीतने में कामयाब रहे। लेकिन शायद अर्जन ठाकुर यह समझने की भूल कर बैठे कि चुनावों में जितना बड़ा फतवा मतदाता देते हैं उतनी बड़ी उम्मीदें वह जीतने वाले उम्मीदवार से रखते भी हैं।
अतः कोटला बैल्ट के मतदाताओं की कुछ बड़ी उम्मीदें जैसे कोटला उपतहसील कार्यालय के लिए भवन का निर्माण , कोटला पुलिस चौकी को पुलिस थाना का दर्जा, कोटला हस्पताल का दर्जा बढ़ाना, वन विभाग के ट्रेनिंग सेंटर कुठहेड़ को चालू करवाना, 32 मील में रैन शैलटर का निर्माण करवाना कोटला बैल्ट में कन्या डिग्री कॉलेज खुलवाना आदि के साथ अन्य विकास के कार्यों को कार्यकर्ताओं की इच्छाओं अनुसार अमली-जामा पहनाना अपेक्षित था, जोकि आजतक नहीं हो पाया है।
इसके इलावा मतदाताओं की नाराज़गी तो खासकर मौजूदा विधायकों को झेलना ही पड़ती है लेकिन इस बार कोटला बैल्ट से भाजपा को सक्रिय कार्यकर्ताओं की नाराज़गी और विरोध आम मतदाताओं से भी ज्यादा झेलना पड़ेगा।
अतः जिसके कारण आगामी ज्वाली विधानसभा के चुनाव परिणाम जो भी रहे लेकिन इस बार कोटला बैल्ट से भाजपा का बढ़त लेने का सपना चकनाचूर होने के पूरे आसार बन चुके हैं।
