हिमखबर डेस्क
हिमाचल प्रदेश सरकार ने आपदा प्रबंधन अधिनियम (DMA) के तहत जारी उस आदेश को वापस ले लिया है, जिसके कारण राज्य में पंचायत और शहरी निकाय चुनाव स्थगित कर दिए गए थे। अब इस फैसले के साथ ही लंबे समय से लंबित पंचायती राज संस्थाओं और नगर निकायों के चुनाव कराने का रास्ता साफ हो गया है।
यह आदेश 08 अक्टूबर 2025 को जारी किया गया था, जिसमें प्राकृतिक आपदाओं के कारण राज्य के कई हिस्सों में संपर्क व्यवस्था बाधित होने का हवाला देते हुए चुनाव टाल दिए गए थे। राजस्व विभाग के आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ के अनुसार अब राज्य में हालात काफी हद तक सामान्य हो चुके हैं, इसलिए लगभग छह महीने बाद सरकार ने यह आदेश वापस लेने का निर्णय लिया है।
यह फैसला हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद लिया गया है। अदालत ने राज्य सरकार को पंचायती राज संस्थाओं और शहरी निकायों के पुनर्गठन से जुड़ी सभी प्रक्रियाएं 28 फरवरी 2026 तक पूरी करने और इसके आठ सप्ताह के भीतर चुनाव कराने को कहा था। यह मामला उच्चतम न्यायालय तक भी पहुंचा था।
13 फरवरी 2026 को सुनवाई के दौरान उच्चतम न्यायालय ने राज्य निर्वाचन आयोग, पंचायती राज विभाग, शहरी विकास विभाग और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को 31 मार्च 2026 तक सभी लंबित प्रक्रियाएं पूरी करने का निर्देश दिया। इसके साथ ही चुनाव प्रक्रिया 31 मई 2026 तक पूरी करने को कहा गया था। इन निर्देशों के बाद राज्य सरकार ने औपचारिक रूप से डीएमए आदेश वापस ले लिया है। इसकी अधिसूचना मुख्य सचिव संजय गुप्ता ने जारी की है।
उल्लेखनीय है कि राज्य में पंचायतों का पांच वर्षीय कार्यकाल 31 जनवरी को समाप्त हो गया था, जबकि 47 नगर निकायों में निर्वाचित प्रतिनिधियों का कार्यकाल 17 जनवरी को खत्म हो गया था। चुनाव में देरी के कारण सभी पंचायतों और 47 से अधिक शहरी निकायों में प्रशासक नियुक्त किए गए हैं।
पर्यवेक्षकों का मानना है कि लंबे समय तक नियुक्त प्रशासकों के माध्यम से स्थानीय निकायों का संचालन लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं माना जाता। उच्चतम न्यायालय ने भी हाल में राज्य की विशेष अनुमति याचिका पर आंशिक राहत देते हुए 31 मई से पहले पंचायती राज और शहरी निकाय चुनाव कराने का निर्देश दिया है।

