आजादी के 75 वर्ष बाद भी काले पानी की सजा काट रहे कुट बन टिल्ली के लोग

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चुनावों के वक्त ही याद आती है नेताओं को, झूठे दिलासे और वादे करके चले जाते हैं नेता अगर विकास किया तो है कहां

देहरा – शिव गुलेरिया

तहसील हरिपुर के अंतर्गत जिला परिषद सदस्य संजय धीमान ने अपने निजी खर्च से कुट बन टिल्ली में पुली डालकर नाले की मरम्मत करवा दी जिसके लिए वहां के ग्रामीणों ने उनका आभार जताया है। उस नाले पर पुली डलने से सीधा- सीधा 10 से 12 घरों को फायदा पहुंचा है।

गौरतलव है कि देहरा विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती पंचायत शेरलुहार के कुट बन टिल्ली गांव को जाने वाली कच्ची सड़क के मध्य एक छोटा सा नाला पड़ता है जिसके ऊपर डाली गई पुलिया टूट गई थी जिस बजह से ग्रामीणों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था।

बता दें बैसे तो इस गांव तक जाने वाली कच्ची सड़क की हालत इतनी दयनीय है कि बड़ी मुश्किल से ट्रैक्टर और मोटरसायकिल के अलावा कोई छोटी गाड़ी गांव तक नहीं पहुंच पाती। यहां के ग्रामीणों ने बताया कि हम तो आजादी के 75 बर्षों के बाद भी काले पानी की सजा काट रहे हैं हमारी सुनने वाला कोई नहीं है।

जब कोई बीमार हो जाये तो उसे चारपाई पर डालकर पक्की सड़क तक पहुंचाना पड़ता है। ग्रामीणों ने बताया कि कुछ दिन पहले जिला परिषद सदस्य संजय धीमान उनके गांव में एक बीमार को देखने के लिए आए थे तो इस दौरान हमने अपनी इस समस्या को उनके समक्ष रखा और उन्होंने एक हफ्ते के अंदर ही इस नाले में पुली डालकर उसे सीमेंट और रेता बजरी डालकर पक्का भी करवा दिया।

ग्रामीणों के अनुसार पुली डलने से आधे रास्ते तक तो गाड़ी पहुंच सकेगी और बाकी की सड़क भी बहने से बच जाएगी । ग्रामीणों का कहना है कि यह पुली काफी समय पहले की बनी हुई थी जो कि आधी टूट चुकी थी और बाकी की बची हुई भी जर्जर हो गयी थी जो कि कभी भी टूट सकती थी। और इसी रास्ते से रमेश चंद को एम्बुलेंस की स्ट्रैचर या चारपाई पर डालकर पक्की सड़क तक पहुंचाना पड़ता है

कुट बन टिल्ली गांव के निबासी रमेश चौधरी पिछले काफी समय से बीमारी के चलते बेड पर हैं जो कि चलने फिरने में भी पूरी तरह से असमर्थ हैं। बता दें कि रमेश चौधरी को हर पांच सात दिनों बाद अस्पताल लेकर जाना पड़ता है लेकिन पक्की सड़क ना होने के चलते उन्हें स्ट्रैचर या चारपाई पर डालकर पक्की सड़क तक पहुंचाना पड़ता है।

ज्ञात रहे कि यह गांव पक्की सड़क से काफी ऊंचाई पर पर स्थित है जहां से पक्की सड़क ढेड़ किलोमीटर के करीव है और ऐसे में खड़ी चढ़ाई होने के चलते घर तक उठाकर पहुंचाना काफी मुश्किल हो जाता है। रमेश चौधरी की पत्नी शंकुन्तला देवी ने बताया कि कई बार तो उनके पति को उठाकर सड़क तक पहुंचाने के लिए चार लोग भी नहीं मिलते
कई वर्षों के इंतजार के बाद भी यह सड़क पक्की नहीं हो पाई

ग्रामीणों का कहना है कि कई वर्षों के इंतजार के बाद भी यह सड़क पक्की नहीं हो पाई है। नेताओं और मंत्रियों के पास बार-बार गुहार लगाने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हुई। उनका कहना है कि इन नेताओं को सिर्फ चुनावों के समय इस गांव की याद आती है और झूठे दिलासे देकर चले जाते है

राजनेता विकास की बात तो करते हैं लेकिन विकास है कहां

जिला परिषद संजय धीमान ने कहा कि मैं कुछ दिन पहले इस गांव में बीमार रमेश चौधरी को देखने गया था। जहां ग्रामीणों ने अपनी समस्या मुझे बताई। मैंने उनसे यहां पुली डालने के लिए एक हफ्ते का समय मांगा था और एक हफ्ते के अंदर नाले में पुली डाल कर उसकी मरम्मत करवा दी।

लेकिन दुख इस बात का है कि जो राजनेता कहते हैं कि हमने क्षेत्र में विकास करवाया है तो वह यहां आकर बताएं कि विकास कहां हुआ है लोगों को विकास के नाम पर सिर्फ झूठे दिलासे ही मिले हैं।

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