हिमखबर डेस्क
हिमाचल पथ परिवहन निगम (HRTC) चालक यूनियन के कार्यरत चालकों और कर्मचारियों ने निगम की बदहाल स्थिति, बसों की खराब हालत और कर्मचारियों की अनदेखी को लेकर कड़ा रुख अपनाया है।
कर्मचारियों का कहना है कि वे खैरात नहीं, बल्कि अपने अधिकारों की मांग कर रहे हैं और किसी भी प्रकार के समझौते के लिए तैयार नहीं हैं। कर्मचारी प्रतिनिधियों ने कहा कि दिन-रात सेवा देने वाले चालक आज भी बिना पर्याप्त छुट्टी के काम कर रहे हैं।
नई भर्तियां नहीं हो रही हैं, जिससे मौजूदा स्टाफ पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। कम से कम 100 बसें सड़कों पर खड़ी हैं। कई वाहनों की हालत ठीक नहीं है। ऐसे में यात्रियों की सुरक्षा और सेवा दोनों प्रभावित हो रही हैं।
कुल्लू में हुए चालक संघ के चुनाव में आए प्रदेश अध्यक्ष ने अपने संबोधन में कहा कि तबादलों के नाम से डरा घमाका कर कर्मचारियों की आवाज दबाने की कोशिश की जाती है, लेकिन अब कर्मचारी डरने वाले नहीं हैं।
HRTC हमारी मां है, इसे घाटे का बहाना बनाकर कमजोर न किया जाए। जब भी हम अपने अधिकारों की बात करते हैं तो कहा जाता है कि निगम घाटे में है।
कर्मचारियों ने कहा कि अगर सरकार बसों को सुचारू रूप से चलाने, रखरखाव सुधारने और स्टाफ की कमी दूर करने पर ध्यान दे, तो एक साल में निगम फायदे में आ सकता है।
कर्मचारियों ने यह भी कहा कि वे किसी भी संगठन में रहें, प्राथमिकता कर्मचारी हित ही होगी। हमें हमारे वैध अधिकार चाहिए। चालक और परिचालक लगातार दबाव में काम कर रहे हैं। प्रबंधन और उच्च अधिकारियों को सिर्फ वेतन लेने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। बल्कि जमीनी स्तर पर हालात सुधारने की जरूरत है।
कर्मचारियों ने प्रदेश के मुख्यमंत्री से मांग की है कि HRTC की वित्तीय स्थिति सुधारने, नई भर्तियां करें। यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष मान सिंह ने कहा कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो आंदोलन तेज किया जा सकता है।

