Big Breaking:ब्लैक फंगस से उत्तराखंड में पहली मौत

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उत्तराखंड, अतुल उनियाल

उत्तराखंड पर कोरोना के साथ साथ ब्लैक फंगस का खतरा मंडरा रहा है..अब तक उत्तराखँड में इस वायरस के कई मामले सामंने आ चुके हैं।

एम्स ऋषिकेश में ब्लैक फंगस से पहली मौत हुई है। इसके अलावा एम्स में भर्ती उत्तराखंड के 12 और यूपी के 5 कोविड मरीजों में ब्लैक फंगस वायरस की पुष्टि हो गई है। सबसे ज्यादा 5 संक्रमित हरिद्वार जिले के रहने वाले हैं। खबर है कि एम्स के विशेषज्ञों की टीम ने इनमें से 11 संक्रमितों की आंखों की सर्जरी भी कर दी है।

बताया जा रहा है कि कुछ दिन पहले देहरादून से एम्स में एक युवक रेफर करवाया गया था। युवक कोविड संक्रमण से पीड़ित था। जांच के दौरान युवक में ब्लैक फंगस के संक्रमण की पुष्टि हुई थी। 36 साल के उस युवक की ब्लैक फंगस से शुक्रवार दोपहर को मौत हो गई थी, लेकिन इसकी जानकारी रविवार को सामने आई।

इस बीच ब्लैक फंगस के संदिग्ध लक्षणों के चलते कई बारी मरीजों की भी जांच की गई। जिनमें ये संक्रमण पाया गया है, उनमें 12 मरीज उत्तराखंड के हैं। आगे जानिए क्या है ब्लैक फंगस और इसके लक्षण क्या हैं।

क्या है ब्लैक फंगस (म्यूकोरमाइसिस) रोग                  दरअसल, म्यूकोरमाइसिस फंगस (ब्लैक फंगस) इंफेक्शन से जुड़ी बीमारी है. यह बीमारी एक तरह के फंगस या फफूंद से फैलती है. इस फंगस के स्पोर्स या बीजाणु वातावरण में प्राकृतिक रूप से मौजूद होते हैं.

आमतौर पर इनसे कोई ख़तरा नहीं, लेकिन अगर शरीर का इम्युनिटी सिस्टम कमजोर हो, तो ये जानलेवा साबित हो जाते हैं. शुगर के मरीज इस बीमारी के ज्यादा ज्यादा शिकार हो रहे हैं. इस रोग में आंख की नसों के पास फंगस इंफेक्शन जमा हो जाता है, जो सेंट्रल रेटिनल आर्टरी का ब्लड फ्लो बंद कर देता है.

इसकी वजह से आंखों की रोशनी चली जाती है. कोरोना संक्रमित मरीज या कोरोना से स्वस्थ हुए कुछ मरीजों में ब्लैक फंगस इंफेक्शन देखा गया है. यह इंफेक्शन आमतौर पर उन लोगों में पाया गया है, जिनका शरीर किसी बीमारी से लड़ने में कमजोर होता है.

कैसे शरीर हो प्रभावित करता है ब्लैक फंगस             आंख, नाक के रास्ते ये फंगस दिमाग तक पहुंचता है और इस दौरान रास्ते में आने वाली हड्डी और त्वचा को नष्ट कर देता है और इसमें मृत्यु दर काफी ज्यादा है. लखनऊ के सीवीओ हॉस्पिटल के वरिष्ठ डॉक्टर एमबी सिंह इस फंगस को घातक तो मानते हैं, लेकिन इससे डरने की जरूरत नहीं मानते हैं.

डॉक्टर का कहना है कि जो पेशेंट बहुत ज्यादा दिन तक ऑक्सीजन और वेन्टीलेटर्स के स्पोर्ट पर रहते हैं और जिनका सुगर अनकंट्रोल है, उनमें से भी किसी किसी को ही ये फंगस अपना शिकार बना रहा है.

ब्लैक फंगस के लक्षण                                                  अगर इसके लक्षणों की बात करें तो इस रोग में अभी तक सिर में बहुत ज्यादा दर्द, आंखों में रेडनेस, आंखों से पानी आना, आंखों के मूवमेंट का बंद हो जाना जैसी परेशानियां देखी गई हैं. इस बीमारी के लक्षणों में नाक जाम होना, आंखों और गालों पर सूजन या पूरा चेहरा की फूल जाना भी शामिल हैं.

कई बार नाक पर काली पपड़ी जमने लग जाती है. आंखों के नीचे दर्द या सिर में दर्द और बुखार भी इसके लक्षण हैं. कुछ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, यह इंफेक्शन नाक से शुरू होता है, जहां से यह ऊपरी जबड़े तक जाता है और फिर दिमाग तक पहुंच जाता है.

बीमारी के बढ़ने के तीन प्रमुख कारण                              कुछ मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो इस बीमारी के बढ़ने के तीन प्रमुख कारण हैं, जिसमें कोरोना, डायबिटीज और स्टेरॉइड्स का बेलगाम इस्तेमाल शामिल है. पहले से ही कुछ बीमारियों से पीड़ित कोविड मरीज में दूसरे रोगों से लड़ने की क्षमता कम हो जाती है. मरीजों का शरीर बाहरी इंफेक्शन से मुकाबला नहीं कर पाता और इसी वक्त यह फंगस हमला बोलता है. इसके अलावा डायबिटीज के मरीजों पर इसका दोगुना खतरा होता है. तीसरा कारण स्टेरॉइड्स का ज्यादा इस्तेमाल है, जिसका कोरोना के इलाज में भी उपयोग होता है. इससे भी प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित होती है.

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