
सिहुंता – अनिल समबयाल
सिहुंता क्षेत्र के साथ लगती छह पंचायतों में स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गई हैं। एक तरफ जहां प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सिहुंता डेपुटेशन के सहारे चल रहा है तो वहीं दूसरी तरफ स्वास्थ्य केंद्र में दवाइयां भी पर्याप्त नहीं हैं।
चिकित्सक न होने के कारण कई बार ग्रामीणों को उपचार के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि इसके बारे में वे कई बार सरकार और विभाग को अवगत करवा चुके हैं लेकिन आज दिन तक चिकित्सक की स्थायी तैनाती नहीं हो पाई है।
आठ माह से ग्रामीण स्थायी चिकित्सक का इंतजार कर रहे हैं। इससे ग्रामीणों में रोष है। जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत गरनोटा, सिहुंता, मोतला, धुलारा, रजैं और खरगट की करीब 12 हजार आबादी सिहुंता स्वास्थ्य केंद्र पर निर्भर करती है।
स्थायी चिकित्सक न होने के कारण लोगों को उपचार के लिए भटकना पड़ रहा है। ओंकार सिंह चौहान, सोमदत्त शर्मा, करनैल सिंह, शेर सिंह जम्वाल, अशोक कुमार और बन्नू का कहना है कि सरकार ने स्वास्थ्य केंद्र तो खोल दिया है लेकिन ग्रामीणों को पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।
बताया कि केंद्र में स्थायी चिकित्सक होना जरूरी है तो वहीं पर्याप्त दवाइयां भी होनी चाहिए। सिहुंता स्वास्थ्य केंद्र में ऐसी व्यवस्था नहीं है। ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि जल्द स्थायी चिकित्सक की तैनाती और दवाइयों की कमी को पूरा किया जाए।
क्या कहते हैं अधिकारी
खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. सतीश फोतेदार का कहना है कि दवाइयों के लिए डिमांड भेजी गई है। स्थायी चिकित्सक न होने के बारे में भी उच्चाधिकारियों को अवगत करवाया जा चुका है।
