
राष्ट्रीय बांस मिशन योजना के तहत कई ग्रामीणों ने शुरू किया अपना कारोबार
पालमपुर – नवीन गुलेरिया
कृषि विभाग द्वारा संचालित राष्ट्रीय बांस मिशन योजना का असर प्रदेश के गांव-कस्बों में देखने को मिल रहा है। कई लोगों ने बांस को ही अपनी कमाई का जरिया बना लिया है। इससे वे न केवल अच्छी कमाई कर रहे हैं, बल्कि विभिन्न मेलों व प्रदर्शनियों में अपने उत्पाद पहुंचाकर अन्य लोगों को भी इस व्यवसाय को लेकर प्रेरित कर रहे हैं।
जिला कांगड़ा के पंचरुखी में तैनात कृषि विभाग के विषयवाद विशेषज्ञ डा. विजय अवस्थी के प्रयासों सेे अब किसानों की तकदीर बदलने लगी है। उन्होंने बताया कि ओडर गांव के मिलाप चंद पुत्र दुनी चंद को इस मिशन के तहत हस्तशिल्प लघु इकाई स्थापित करने के लिए मंजूरी प्रदान की गई थी।
अब मिलाच चंद विभिन्न तरह के बांस उत्पादों जैसे किरड़ा, टोकरा, चंगरे, किल्टा, सुप आदि बनाकर अच्छी कमाई कर रहे हैं। वह अपने उत्पादों को विभिन्न समारोहों, मेलों व प्रदर्शनियों में ले जाकर दूसरे लोगों को भी विभाग की योजनाओं के बारे में जानकारी प्रदान करते हैं।
गौर हो कि केंद्र सरकार द्वारा पोषित राष्ट्रीय सतत् खेती मिशन के अंतर्गत राष्ट्रीय बांस मिशन को प्रदेश में लागू करने की स्वीकृति वर्ष 2018-19 में दी गई थी। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य बांस क्षेत्र को बढ़ावा देना, बांस की उन्नत किस्मों की पैदावार बढ़ाना, प्राथमिक प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना करना तथा बांस आधारित हस्ताशिल्प के विपणन को बढ़ावा देना है।
वर्ष 2020-21 में जिला कांगड़ा के विकास खंड पंचरुखी में कृषि विभाग द्वारा यह योजना लागू की गई तथा चार हेक्टर भूमि में उन्नत किस्म के पौधे लगाए गए । इनके काफी अच्छे परिणाम सामने आए हैं।
