
नाहन, 15 जुलाई – नरेश कुमार राधे
5.50 करोड़ की लागत से नाहन बस स्टैंड पर बहुमंजिला पार्किंग। उम्मीद थी कि बस स्टैंड के आसपास सड़कों के किनारे अवैध पार्किंग से निजात मिल जाएगी, लेकिन जैसा सोचा गया था, वैसा धरातल पर नहीं हुआ है। पार्किंग उपलब्ध होने के बावजूद भी सड़कों के किनारे अवैध पार्किंग का सिलसिला जारी है।
सवाल यह उठता है कि अवैध पार्किंग के खिलाफ क्यों ठोस कार्रवाई से परहेज किया जा रहा है। क्या ट्रैफिक पुलिस इस कारण नरमी बरत रही है, क्योंकि राजनीतिज्ञ नहीं चाहते कि अवैध पार्किंग के खिलाफ कार्रवाई हो। नगर परिषद भी कड़क एक्शन लेने से संकोच कर रही है।
बस स्टैंड से वाया गुन्नुघाट होते हुए दिल्ली गेट सर्कुलर रोड लोक निर्माण विभाग के अधीन आती है, जबकि शहर की अंदरूनी सड़कें नगर परिषद के हवाले है। एक आशंका यह भी है कि अवैध पार्किंग करने वालों का हौसला इस कारण बुलंद हो सकता है, क्योंकि उन्हें राजनीतिक संरक्षण हासिल है।
विपक्ष भी सत्ता पक्ष पर केवल राजनीतिक हमले बोलने में माहिर रहता है, जबकि स्थानीय मुद्दों पर विपक्षी दल भी खामोश रहता है।
राजनीतिक दलों से जुड़े लोग भी कहीं न कहीं अवैध पार्किंग की कतार में शामिल होते है। खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ता है।
लाखों रुपए की महंगी गाड़ियां खरीदने वालों को पार्किंग शुल्क अदा करने में दिक्कत हो रही है। जानकारों की मानें तो जब तक तक सख्ती नहीं की जाएगी तब तक शहर की हालत को नहीं सुधारा जा सकता।
11 जुलाई 2022 को हिमाचल प्रदेश पथ परिवहन निगम के नाहन बस अड्डे पर बहुमंजिला पार्किंग को शुरू कर दिया गया। हालांकि उद्घाटन 14 अप्रैल को हो गया था,मगर इसे शुरू नहीं किया जा सका था।
कमाल की बात यह है कि पार्किंग उपलब्ध होने के बावजूद कच्चा टैंक पुलिस चौकी के आसपास अवैध पार्किंग की भरमार है।
अवैध पार्किंग करने वाले भी इस बात को भूल जाते हैं कि उनके अपने भी इन्ही सड़को पर चलते हैं। आलम यह हो चुका है कि एचआरटीसी को डीलक्स बस सेवा हो नाहन बस स्टैंड तक लाने में भी मुश्किल हो सकती है। वॉल्वो बस ( इस कारण नहीं आती क्योंकि सड़कों के किनारे वाहनों का अतिक्रमण होता है।
अरसा पहले नगर परिषद ने भी सड़को किनारे पार्किंग पर फीस लेने का निर्णय लिया था लेकिन बाद में इसे फाइलों में दबा दिया गया।
चौगान मैदान के समीप भी नगर परिषद ने तीन पार्किंग ठेके पर दी हुई है,यहां भी पार्किंग के इस्तेमाल की बजाय सड़को का उपयोग किया जाता है। शाही महल के सामने भी हालत बद्द्तर होती जा रही है।
उधर निगम के आरएम संजीव बिष्ट ने कहा कि बस स्टैंड की पार्किंग में 20 से 25 वाहनों की औसत आ रही है, जबकि क्षमता इससे दस गुणा की है।
